पिता से क्यों मिला नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप, किस श्राप की वजह से इधर-उधर भटकते रहते है देवऋषि नारद..!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

नारायण-नारायण (Narayan) करने वाले नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप मिला था ।

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार देव लोक का दूत कहे जाने वाले देवऋषि नारद, ब्रह्मा (Brahma) के सात मानस पुत्रों में से एक हैं।

भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक नारद जी (Narad Ji) एक लोक से दूसरे लोक की परिक्रमा करते हुए सूचनाओं को प्रेषित करते थे।

नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप
नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप

आज हम आपको बता रहें है वैसे तो नारद मुनि को कई बार प्रेम हुआ पर फिर भी किसी से भी नहीं हुई उनकी शादी,

इसका कारण था उनके पिता द्वारा अविवाहित होने का श्राप मिलना।

आइये जानते है ऐसा क्या हुआ की ब्रह्मा (Brahma) जी ने दिया नारद जी (Narad Ji) को अविवाहित रहने का श्राप:

नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप

ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्मखण्ड में एक कहानी का उल्लेख मिलता है

जिसमें नारद (Narad Ji) को उनके पिता ब्रह्मा से आजीवन अविवाहित रहने का श्राप मिला था।

इस कहानी के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा (Brahma) सृष्टि का निर्माण कर रहे थे तो उनके चार पुत्र हुए।

वो तपस्या पर निकल गए।

नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप
नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप

इसके बाद बारी आई नारद (Narad Ji) मुनि की। नारद स्वभाव से चंचल थे।

नारद मुनि से ब्रह्मा (Brahma) ने कहा कि ‘तुम सृष्टि की रचना में मेरा सहयोग करो और विवाह कर लो।

उन्होंने अपने पिता को मना कर दिया।

अपनी अवेहलना सुनकर ब्रह्मा (Brahma) बहुत क्रोधित हो गए।

उन्होंने नारद (Narad Ji) को आजीवन अविवाहित रहने का श्राप देते हुए कहा।

तुम जीवन में कई बार प्रेम का अनुभव करोगे लेकिन तुम चाहकर भी कभी विवाह नहीं कर पाओगे।

तुम जिम्मेदारियों से भागते हो इसलिए तुम्हें पूरी दुनिया में केवल भाग-दौड़ ही करनी पड़ेगी।

इस तरह नारद को श्राप मिल गया और वो युगों-युगों तक एक लोक से दूसरे लोग में विचरण करते रहे।

नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप
नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप

श्राप की वजह से इधर-उधर भटकते रहते है देवऋषि नारद

साथ ही हम आपको एक दूसरे श्राप के बारे में भी बता रहें है जिसकी वजह से नारद जी (Narad Ji) को हमेशा इधर-उधर भटकते रहना पड़ा।

कहते हैं राजा दक्ष की पत्नी आसक्ति ने 10 हजार पुत्रों को जन्म दिया था।

सभी पुत्रों को नारद जी (Narad Ji) ने मोक्ष का पाठ पढ़ा दिया, जिससे उनका मन मोह-माया से दूर हो गया।

नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप
नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप

फिर दक्ष ने पंचजनी से विवाह किया और उनके एक हजार पुत्र हुए।

इन पुत्रों को भी नारद जी (Narad Ji) ने मोह माया से दूर रहना सीखा दिया।

इस बात से क्रोधित होकर दक्ष ने नारद जी को श्राप दे दिया कि वे हमेशा इधर-उधर भटकते रहेंगे।

 

परम पिता परमेश्वर आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें ।

॥ जय महाकाल ॥

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