घर पर कैसे करें पिंडदान तथा तर्पण – श्राद्ध में पितरों के लिए घर पर पूजा-पाठ

श्राद्ध 2020

हर वर्ष की तरह इस बार भी पितृपक्ष की परंपरा चल रही है। परंतु कोरोना महामारी के चलते पिंडदान, तर्पण और इससे जुड़ी कई परंपराएं किसी स्थान पर जाकर नहीं हो पा रही है। गया धाम में भी इस बार तर्पण नहीं होगा। इससे लोगो को अपने पुरखों के लिए पूजा पाठ की भावना को रखने वालों को काफी दुख हुआ है। गया में भी फाल्गु नदी, अक्षवट तथा विष्णुपद मंदिर में किसी भी बाहरी के लिए कोई पूजा-पाठ नहीं हो रही है।

देश के कई और स्थानों पर पितृपक्ष में पिंडदान तथा तर्पण करने की परंपरा है पर इस बार लोग ब्रह्मकपाल, उज्‍जैन और नासिक जैसी जगहों पर भी जाने से बच रहे हैं। पितृपक्ष में पितरों और पुरखों के लिए तर्प और पिंडदान का ज्योतिषीय तथा धार्मिक महत्व होता है। इसलिए इस बार लोगो को घर में रहकर ही पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर रहे हैं । पितृपक्ष इस बार 2 सितंबर से शुरू हुआ है और अंतिम पितृ पक्ष 17 सितंबर को खत्‍म होगा ।

इस तरह करे घर में पिंडदान और तर्पण :

वैसे कोरोना की वजह से अगर आप कहीं जाकर पिंडदान नहीं कर पा रहे हैं तो आपको बवताते है कि कैसे घर में ही पितरों की पूजा करके आप इस विधान को कर सकते है। जी हां, घर पर रहकर भी तर्पण कर पितरों को खुश किया जा सकता है। इसके लिए सुबह-सुबह तर्पण करने से पहले स्नान करके दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके आप बैठ जाएं। अपने हाथ में कुश लेकर जल में काले तिल और सफेद फूल मिलाएं और पितरों को यही जल अर्पित करें । इसके पश्चाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें । भोजन का दान करने का अलग महत्व है । तर्पण करने वाले व्‍यक्‍ति को सात्विक आहार ही ग्रहण करना होगा । अगर आपके पास दिन में समय नहीं है तो सूर्यास्त के समय भी तर्पण कर सकते है ।

इस प्रकार सांकेतिक पूजा करके आप अपने पितरों के लिए पूजा तथा प्रार्थना कर सकते है। स्थान पर विधि-विधान से आप पिंडदान करके बहुत सारे लाभ पाते है और इस तरह घर पर भी तर्पण करके आप कुछ फल प्राप्त कर सकते है।