क्या आप जानते है राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य; नहीं तो जरूर पढ़ें…!!!!

धार्मिक कथा (Religious Story) 

रामायण के बारे में कई ऐसे रहस्य है जिनके बारे में तो शायद हमको पता भी नहीं है।  ऐसे ही अयोध्या के राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य है ।

आइये जानते है उस रहस्य के बारे में।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य
राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य

एक बार भ्रमण करते हुए राजा दशरथ (King Dashrath) वन की ओर निकले ।

अक्सर राजा दशरथ (King Dashrath) जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी (Kaikayi) को भी अपने साथ ले जाते थे।

इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ (King Dashrath) के साथ होती थी।

वहां उनका समाना बाली (Baali) से हो गया।

राजा दशरथ (King Dashrath) की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य
राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य

युद्ध में बाली राजा दशरथ (King Dashrath) पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए,

क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पड़ जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी।

अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हर राजा दशरथ (King Dashrath) की ही होगी।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य

राजा दशरथ (King Dashrath) के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी (Kaikayi) को वहाँ छोड़ जाए या

रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए।

तब राजा दशरथ (King Dashrath) को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी (Kaikayi) के साथ वापस अयोध्या लौटना पड़ा।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य
राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य

रानी कैकयी (Kaikayi)इस बात से बहुत दुखी थी।

यह बात उन्हें हर पल काटे की तरह चुभने लगी की उनके कारण राजा दशरथ (King Dashrath) को अपना मुकुट छोड़ना पड़ा।

वह दिन रात मुकुट की वापसी की चिंता में रहतीं थीं।

जब श्रीराम (Shree Ram) के राजतिलक का समय आया तब दशरथ जी व कैकयी (Kaikayi) को मुकुट को लेकर चर्चा हुई।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य
राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा रहस्य

यह बात तो केवल यही दोनों जानते थे।

कैकेयी (Kaikayi) ने रघुकुल की शान को वापस लाने के लिए श्री राम (Shree Ram) के वनवास का कलंक अपने ऊपर ले लिया और श्री राम को वन भिजवाया।

उन्होंने श्री राम (Shree Ram) से कहा भी था कि बाली से मुकुट वापस लेकर आना है।

 

परम पिता परमेश्वर आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें ।

॥ जय महाकाल ॥

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