पढ़िए; वो जगह जहाँ पांडवों को मारने के लिए हुआ था लाक्षागृह का निर्माण..!!!

महाभारत से जुड़ी हुई कई मान्यताओं और धारणाये हैं, महाभारत एक ऐसा ग्रन्थ हैं जिसमे अपने आप में कई रहस्य छिपे हुए हैं, कौरवों और पांडवों के इस भीषण युद्ध में लाक्षागृह का जिक्र तो अपने सुना ही होगा । हालाँकि लाक्षागृह तो जलकर खाक हो गया था लेकिन आज भी वो जगह मौजूद है, जहां

महाभारत महा ग्रन्थ
महाभारत महा ग्रन्थ

दुर्योधन और कोरवो ने लाक के लाक्षागृह का निर्माण किया था । आज हमारे इस पोस्ट में हम आपको लाखामंडल की पौराणिक गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं । यह गुफा उत्तराखंड में स्थित है ।

बात उस समय की थी जब युधिष्ठिर को राज्य का युवराज घोषित किया गया था , तो दुर्योधन और कोरवो को ये बात हजम नहीं हुई और मामा शकुनी के बहकावे में आकर उन्होंने पांडवों के खिलाफ एक षड़यंत्र रचा और उनको को मारने के लिए लाक्षागृह का निर्माण करवाया ।षड़यंत्र के अनुसार कोरवो

लाखामंडल का प्रवेश द्वार
लाखामंडल का प्रवेश द्वार

ने छल से माता कुंती के साथ पांडवों को मेले में जाने के लिए कहा और उनके विश्राम करने की व्यवस्था लाक्षागृह में की गयी । ताकि उचित समय देख कर लाक से बने लाक्षागृह में आग जला कर माता कुंती के साथ पांडवों को मोत के घाट उतार सके, लेकिन श्री कृष्ण के परम भक्त और दासी पुत्र विदुर जिनको दिव्य दृष्टि प्राप्त थी, उन्होंने समय रहते हुए पांडवों को इस षड़यंत्र के बारे में सूचित कर दिया और इस तरह से पांडव उस लाक्षागृह से जीवित बाहर निकल गए थे ।

भगवान भोले बाबा का मंदिर
भगवान भोले बाबा का मंदिर

सुन्दर वादियों और प्राकृतिक सुंदरता से लबा- लब तथा यमुना नदी के किनारे बसा लाखामंडल गांव है। यह स्थान देखने में बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित करने वाला है।

इतिहासकारों के अनुसार गाव के इस मंदिर और इसके आस-पास का क्षेत्र, महाभारत काल के लाक्षागृह प्रकरण से सम्बंधित है। उस समय दुर्योधन और कोरवो ने लाक से लाक्षागृह को बनवाया था ताकि वे माता कुंती के साथ पांडवों को जिंदा जलाने के अपने षड़यंत्र में सफल हो सके । महाभारत के

भगवान भोले बाबा का मंदिर
भगवान भोले बाबा का मंदिर

अनुसार, जब लाक्षागृह को जला दिया गया था, लेकिन विदुर की सहायता से पांड्वो ने एक गुप्त सुरंग की मदद से अपने प्राणों की रक्षा की थी. ऐसा माना जाता हे की वह सुरंग एक गुफा के मुह पर जा कर खुलती है, जो अभी भी लाखामंडल में मौजूद है।

इस पवित्र देव भूमि को महाभारत काल से जोड़ा जाता है यहां स्थित भगवान भोले बाबा के मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना

भगवान भोले बाबा मंदिर में ग्रेफाइट से बना शिवलिंग
भगवान भोले बाबा मंदिर में ग्रेफाइट से बना शिवलिंग

अज्ञातवास के समय धर्मराज युधिष्ठिर और पांड्वो ने की थी।

ऐसी मान्यता है यहां कि प्रार्थना करने से व्यक्ति को पाप – दोषों से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर में ग्रेफाइट से बना शिवलिंग है जो मुख्य आकर्षण का केन्द्र हे तथा इसकी एक और विशेषता यह है कि जब इसका जलाभिषेक किया जाता है, तो यह चमकता है और इसमें जलाभिषेक कर रहां भक्त

मुख्य मंदिर के बगल में द्वारपाल के रूप में दानव और मानव
मुख्य मंदिर के बगल में द्वारपाल के रूप में दानव और मानव

अपना प्रतिबिंब भी देख सकता है। मुख्य मंदिर के बगल में द्वारपाल के रूप में दानव और मानव को दर्शाती दो मूर्तियां स्थित हैं, कुछ लोगो का ऐसा भी मानना हे की ये मूर्तियां भीम और अर्जुन की हैं। इन मूर्तियों के लिए यह बात कही जाती है कि मरे हुए आदमी का शरीर अगर इनके पास रख दिया जाए, तो वह कुछ समय के लिए जीवित हो जाता है ।

 

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