जरूर पढ़ें: नवरात्रि में होने वाली विभिन्न विधियों का महत्व..!!!

इस बार शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो चुके है और 30 सितंबर तक चलेंगे । जैसा की आप जानते ही है नवरात्र में मां के नौ रूपों की पूजा होती है । सनातन काल से ऐसी मान्यता है कि इन नौ दिनों में दुर्गा मां धरती पर आकर भक्तों का उद्धार करती हैं । नवरात्र अश्विन मास की पहली तारीख और सनातन काल से ही मनाया जा रहा है । नौ दिनों तक, नौ नक्षत्रों और दुर्गा मां की नौ शक्तियों की पूजा की जाती है । शारदीय नवरात्रों में नौ दिनों तक दुर्गा मां की पूजा के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है । माना जाता है कि धर्म की अधर्म पर जीत, सत्य की असत्यन पर जीत के लिए दसवें

माँ की मनमोहक छवि
माँ की मनमोहक छवि

दिन दशहरा मनाते हैं ।चलिए आज जानते है नवरात्री के दौरान होने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं का महत्व:

कलश स्थापना का महत्व

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र व्रत-पूजा में कलश स्थापना का महत्व सर्वाधिक है, क्योंकि कलश में ही ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रहों, सभी नदियों, सागरों-सरोवरों, सातों द्वीपों,चौंसठ योगिनियों सहित सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास रहता है, तभी विधिपूर्वक कलश पूजन से सभी देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है ।

अखंड ज्योत का महत्व:

अखंड ज्योत को जलाने से घर में हमेशा मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है । ऐसा जरूरी नही है कि हर घर में अखंड ज्योत जलें । पर ध्यान रखिये अखंड ज्योत के भी कुछ नियम होते हैं जिन्हें नवरात्र के दिनों में पालन करना होता है ।

मां दुर्गा का महागौरी रूप
मां दुर्गा का महागौरी रूप

दुर्गा अष्टमी का महत्व

नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है इसे दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।

कन्या पूजन का महत्व

नौ कन्याएं को नौ देवियों का रूप माना जाता है। इसमें दो साल की बच्ची, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छह साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा का स्वरूप होती हैं। नवरात्र के नौ दिनों में मां अलग-अलग दिन आवगमन कर भक्तों का उद्धार करेंगी।

 

॥ जय माता दी ॥

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