नागपंचमी पर पढ़िए अनोखा कुंड जहाँ सिर्फ दर्शन मात्र से दूर हो जाता है काल सर्प दोष..!!!!

नागपंचमी पर पढ़िए अनोखा कुंड जहाँ सिर्फ दर्शन मात्र से दूर हो जाता है काल सर्प दोष..!!!!

नागकूप:जहाँ सिर्फ दर्शन मात्र से दूर हो जाता है काल सर्प दोष
नागकूप:जहाँ सिर्फ दर्शन मात्र से दूर हो जाता है काल सर्प दोष

आज हम आपको काशी के जैतपुरा क्षेत्र के अद्भुत कुंड के बारे में बता रहें है, जहां आज भी नागों का निवास है। इस कुंड का वर्णन तमाम धर्म शास्त्रों में वर्णित है, जिनके अनुसार इस कुंड के दर्शन से नाग दंश भय के साथ ही काल सर्प योग से भी राहत मिलती है।इसलिए इस कुंड का नाम नागकूप रखा गया है, जहां दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।मान्यता यह भी है की इस कूप का रास्ता सीधे नाग लोक को जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में मां गंगा के अवतरण के पहले ही नागकुंड की स्थापना हो चुकी थी। यहां पर पंतजलि ऋषि ने यहां अपने तप के बल पर तालाब के अंदर स्थित कुआं में शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसकी आज भी नागपंचमी के दिन पूजा होती है।नागकुंड तालाब के नीचे कुआं है। यहां पर खास तरह का शिवलिंग रखा हुआ है। साल में एक बार नागपंचमी के पहले तालाब व कुआं का पानी निकाला जाता है और फिर कुआं के अंदर

साल में एक बार नागपंचमी के पहले तालाब व कुआं का पानी निकाला जाता है
साल में एक बार नागपंचमी के पहले तालाब व कुआं का पानी निकाला जाता है

शिवलिंग को निकाल कर श्रृंगार किया जाता है।

नागकुंड स्थित कुंए से नागलोक जाने का मार्ग है। धार्मिक मान्यता यही कहती है। नागकुंड का शिवलिंग अपने आप में अनोखा है। आमतौर पर शिवलिंग का अघ्र्यआधा दूर तक गोल होता है उसके बाद आगे से लंबा हो जाता है। नागकुंड का अघ्र्य चारों तरफ से गोल होता है। साल भर यह शिवलिंग

उसी कुंए में स्थापित रहता है।

 

॥ हर हर महादेव ॥

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