आज जानिए क्या है कोई भी शुभ कार्य के पहले नारियल फोडऩे का महत्व…!!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

हमारे हिन्दू में पूजा करने की विधि बताई गई है और पूजा(Pooja) में प्रयोग की जाने वाली सभी वस्तुएं जैसे चावल, रोली, आम के पत्ते, तिल, इत्र, नारियल(Nariyal) आदि हर एक वस्तु का अपना ही महत्व है।

पूजा में नारियल
पूजा में नारियल

आपने यह तो देखा होगा जब भी कोई व्यक्ति अपना नया व्यवसाय शुभारंभ करते है या फिर कोई भी शुभ मांगलिक कार्य हो चाहे शादी हो, त्योहार हो या फिर कोई महत्वपूर्ण पूजा हो तो व्यक्ति भगवान्(Bhagwaan) की मूर्ति के सामने नारियल(Nariyal) फोडते।

पूजा की सामग्री में यह आवश्यक रूप से रहता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी भारतीय सभ्यता में, पूजा-पाठ में नारियल(Nariyal) को शुभ और मंगलकारी माना गया है।

नारियल

चलिए अब हम आपको श्री फल के बारे में कुछ जानकारी देते है साथ ही यह भी बताते है यह इतना महत्व क्यों रखता है ।

  • संस्कृत में इसे ‘श्रीफल’ कहते है जिसमे ‘श्री’ का अर्थ लक्ष्मी।
  • हिन्दू धर्म की पौराणिक परम्परा के अनुसार, लक्ष्मी(Lakshmi) के बिना कोई भी शुभ कार्य पूरा नही होता है।
पूजा में नारियल
पूजा में नारियल
  • संस्कृत में नारियल(Nariyal) के पेड़ को ‘कल्पवृक्ष’ कहते है।
  • माना जाता है कि ‘कल्पवृक्ष’ सभी की मनोकामनाओ को पूरा करता है इसलिए शुभ कार्यो और पूजा में नारियल(Nariyal) का उपयोग होता है।

  • अपने कभी ध्यान दिया होगा कि नारियल(Nariyal) की ऊपर के हिस्से पर तीन निशान होते है।
  • माना है कि ये भगवान शिव(Shiv) की तीन आँखे है और लोगों का माना है कि ये ब्रह्मा(Brahma), विष्णु(Vishnu), महेश(Mahesh) है।
  • नारियल(Nariyal) को तांबे के लोटे पर रखकर उस पर लाल कपड़ा चढ़ा कर त्रिदेवो की पूजा करते है।
  • भगवान से प्रार्थना करते है कि अपनी दृष्टी और कृपा हम पर बनाये रखे।
नारियल की ऊपर के हिस्से पर तीन निशान होते है
नारियल की ऊपर के हिस्से पर तीन निशान होते है

धार्मिक कथा ( Religious Story)

  • भगवान के चरणों में श्रीफल चढ़ाने से बुरी शक्ति का नाश होता है।
  • राहु और शनि की महादशा, वित्तीय समस्याएं, काला जादू आदि शक्ति का नाश होता है।
  • पूजा(pooja) के बाद नारियल(Nariyal) का प्रसाद इसलिए बांटा जाता कि भगवान(Bhagwaan)के चरणों में आने से नारियल(Nariyal) पवित्र हो जाता है ।
  • जब कोई भक्त उसे ग्रहण करता है उसका मन पवित्र हो जाता है।

  • पूजा के बाद नारियल(Nariyal) को फोड़ कर सबको प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
  • ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि नारियल(Nariyal) को तोडना मानव के अहंकार को तोडना जैसा बताया गया है।
  • नारियल(Nariyal) का बाहर का खोल अहंकार की तरह ठोस और कडक़ होता है।
पूजा के बाद नारियल को फोड़ कर सबको प्रसाद के रूप में दिया जाता है
पूजा के बाद नारियल को फोड़ कर सबको प्रसाद के रूप में दिया जाता है
  • खोल को जब तक तोड़ नही दिया जाये तो न वो किसी गुण को अंदर जाने देता है और न ही बाहर आने देता है।
  • यह हमारे सिर का प्रतीक माना जाता है।
  • किसी भी शुभ कार्य करने पहले हम इसे फोडक़र अहंकार को चूर करते है।
  • हम भगवान से प्रार्थना करते है कि दुनिया भर की अच्छाइयां को देख सके।
  • हमारे ज्ञान का विकास हो।

One Comment