14 जून ,मिथुन संक्रांति : कब और क्यो मनाया जाता है यह पर्व

सूर्यदेव जब वृषभ राशि को छोड़ कर मिथुन राशि मे प्रवेश करते है , उस दिन को मिथुन संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2020 में यह पर्व 14 जून को मनाया जा रहा है |

महिलाओ को प्रकृति ने मासिक धर्म का वरदान दिया था । मासिक धर्म से महिलाए मातृत्व का सुख भोग सकती है ।जिस तरह महिलाओ को मासिक धर्म होता है , उसी तरह धरती माँ को भी मासिक धर्म हुआ था । ऐसा माना जाता है कि इस पर्व से तीन दिन पहले तक मासिक धर्म हुआ था । जिसको धरती माता के विकास का प्रतिक माना जाता है ।चौथे दिन धरती माँ जिनको सिलबट्टे के रूप में भी माना जाता है उन्हें स्नान कराया जाता है । इस दिन भूदेवी की पूजा की जाती है । आज भी जगन्नाथ मंदिर , ओडिसा में भगवान विष्णु की पत्नी भू देवी की चांदी की मूर्ति विराजमान है ।

◆क्या किया जाता है इस पर्व पर :-

1.इस दिन सिलबट्टे को भूदेवी के रूप में पूजा जाता है । सिलबट्टे को दूध व पानी से नहलाया जाता है ।
2.इसके पश्चात भूदेवी को चंदन , हल्दी , फूल चढ़ाए जाते है ।
3.इस पर्व पर पूर्वजो को श्रद्धांजलि भी दी जाती है ।
4.मिथुन संक्रांति के दिन घी , चावल के आटे व नारियल से बनी हुई मिठाई बनाई जाती है ।
5.इस दिन चावल किसी भी रूप में ग्रहण नही किया जाता है ।
◆मिथुन संक्रांति शुभ मुहरत :-
मिथुन संक्रांति का पुण्यकाल 12बजकर 22 मिनट पर प्रारम्भ होगा वही 7 बजकर 22 मिनट तक चलेगा । मिथुन संक्राति का महापुण्य काल का समय 5 बजकर 1 मिनट से 7 बजकर 20 मिनट तक चलेगा । 13 जून और 14 जून की रात को 12 बजकर 22 मिनट तक काल का समय रहेगा ।

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