इस नवरात्री जानिए महाकाली के काले रंग का रहस्य…!!!

महाकाली को दुर्गा का अवतार कहा गया है जो दुष्टों का संहार करने के लिए संसार में अवतरित हुईं, जिनसे हर कोई भय खाता है। काल (समय) के नारी सुलभ रूप में अवतरित हुई ‘महाकाली’ को सृजन, संरक्षण और विनाश की देवी कहा जाता है। देवी के नौ रूपों में से एक काली महिला सशक्तिकरण की एक अचंभित करने वाली मिसाल हैं। आज हम महाकाली के काले रंग का रहस्य जानने वाले है तो आइये जानते है।

महाकाली दुर्गा का अवतार
महाकाली दुर्गा का अवतार

महाकाली के अवतरित होने से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। जब मां दुर्गा महिषासुर नामक राक्षस के साथ युद्ध कर रही थीं, तो वह इतनी क्रोधित हो गईं कि उनके मस्तक की ज्वाला से मां काली अवतरित हुईं। गहरे काले रंग में बेहद विशाल काया वाली महाकाली ने सारे राक्षसों को मार डाला और

उनके रक्त का सेवन किया। मां दुर्गा जिन-जिन असुरों का संहार करती गईं, महाकाली ने उनके सिर काटकर अपने गले में लटका लिए। सारे राक्षस मारे गए लेकिन फिर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव, स्वयं उनके पति, उनके पैरों के नीचे लेट गए। उन पर पांव रखते ही महाकाली शांत हो गईं। उन्हें इस बात का भारी पश्चाताप था कि उन्होंने अपने पति पर पैर रख दिया।

दूसरी मान्यता के अनुसार पार्वती के शरीर की मैल से काली का उद्भव हुआ। इसलिए काली का रंग काला और पार्वती का श्वेत है। मां काली के इस काले रंग को विनाश और सृजन से भी जोड़ा जाता है।

महाकाली गुस्से में
महाकाली गुस्से में

तीसरी मान्यता कहती है की काली का निर्माण देवी अम्बिका ने असुरों के संहार के उद्देश्य से किया था। अवतरित होने के साथ ही काली ने चंड और मुंड नाम के दो राक्षसों के जीवन का संहार किया। इन दोनों असुरों को मारने के बाद काली को रक्तबीज नाम के असुर सम्राट की सेना से लड़ना पड़ा।

रक्तबीज के रक्त की हर बूंद से एक और रक्तबीज का निर्माण होता था इसलिए उसकी सेना निरंतर बढ़ती जा रही थी। रक्तबीज को मारने के लिए महाकाली ने उसके शरीर में मौजूद खून की एक-एक बूंद पी ली और उसकी सारी प्रतिकृतियों को खा गईं। रक्तबीज को मारने के पश्चात काली क्रोध में तांडव करने लगीं और उन्हें शांत करवाने के लिए भगवान शिव को उनके पैरों के नीचे लेटना पड़ा।

॥ जय महाकाली ॥

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