इस प्रकार चढ़ाये महादेव को बेलपत्र मिलेगी सभी पापो से मुक्ति !!

बेलपत्र भगवान शिव को बहुत ही प्रिय चीज है ऐसी मान्यता है कि बेल पत्थर और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है।, पूजा में इनका प्रयोग करने से यह बहुत जल्दी खुश होते हैं लेकिन इसके चढ़ाने के भी कुछ नियम हैं जिनका हमें पालन करना चाहिए।

सबसे पहले आइए जानते हैं बेलपत्र तोड़ने के क्या नियम हैं हमें सबसे पहले यह ध्यान रखना है कभी भी चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या अतिथियों को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही संक्रांति के समय भी बेलपत्र नहीं तोड़े इसलिए इन तिथि त्योहार से पहले तोड़ा गया बेलपत्र ही शिव जी को चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र ना मिल सके तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को धोकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

टहनी से चुन चुन कर सिर्फ बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए कभी भी पूरी टहनी ही तोड़नी चाहिए।

आइए जानते हैं शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र महादेव को हमेशा बेलपत्र उल्टा अर्पित करना चाहिए। यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए। ध्यान रखें कि बेलपत्र में चक्र यावर नहीं होना चाहिए बेलपत्र 3 से लेकर 11 किलो तक के होते हैं। यह जितने अधिक पत्र के होते हैं उतने ही उत्तम माने जाते हैं। अगर बेलपत्र उपलब्ध हो तो बेल के वृक्ष से के दर्शन ही कर लेना चाहिए उससे भी पाप नष्ट हो जाते हैं ।शिवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र की कभी भी उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए।

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