आज पढ़िए क्यों मनाई जाती है गुड़ी पड़वा…!!!

आज पढ़िए क्यों मनाई जाती है गुड़ी पड़वा…!!!

गुड़ी पड़वा की गुड़ी

२९ मार्च को गुड़ी पड़वा का पावन पर्व है। आज हम आपको बता रहे है क्यों मानते है। गुड़ी पड़वा में ‘गुड़ी’ का मतलब ‘विजय पताका’ होता है। मान्यता है कि इस दिन शालिवाहन नामक कुम्हार के पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों का निर्माण कर एक सेना बना दी थी और उस पर पानी छिड़ककर प्राण फूंक दिए थे। इसके बाद उस मिट्टी की सेना ने शक्तिशाली दुश्मनों को पछाड़ दिया था और विजय पा ली थी। इसी विजय के प्रतीक के रूप में ‘शालिवाहन शक’ की शुरुआत मानी गई है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ‘उगादि’ और महाराष्ट्र में यह पर्व ‘ग़ुड़ी पड़वा’ के रूप में मनाया जाता है।

गुड़ी पड़वा के दिन मांगलिक स्नान किया जाता है,जिसमें शरीर को तेल मिश्रित उबटन लगाकर गुनगुने पानी से नहाया जाता है। स्नान के बाद शुद्ध एवं पवित्र होकर नए वस्त्र पहने जाते हैं। महाराष्ट्रीयन महिलाएं अपनी पारंपरिक पोशाक नौ गज की साड़ी पहनती है और पुरुष इस दिन कुर्ता पायजामा और लाल या केसरिया पगड़ी पहनते हैं।

गुड़ी पड़वा पर घर को फूलो से सजाया जाता है

घर की महिलाएं पवित्र स्नान लेने के बाद सबसे पहले अपने घर के आंगन में रंगोली बनाती है। वे चावल के पाउडर, सिंदूर और हल्दी से रंगबिरंगी रंगोली बनाती है। रंगोली बनाने का मकसद नकारात्मक ऊर्जाओं को निकालना और अच्छी किस्मत लाना है।

फूल पवित्रता को दर्शाते हैं और इसकी खुश्बू सकारात्मक ऊर्जा फैलाती है इसलिए गुडी पड़वा पर घर के प्रवेश द्वारा को भी तरह तरह के फूलों से सजाया जाता है।

गुड़ी पड़वा पर घर के बाहर एक डंडे में पीतल का बर्तन उलटकर रखते हैं जिस पर सुबह की पहली किरण पड़ती है। इसे गहरे रंग ( विशेष रूप से लाल, पीले या केसरिया)की रेशमी की साड़ी व फूलों की माता से सजाया जाता है। इसे आम के पत्ते और नारियल से घर के बाहर उत्तोलक के रूप में टांगा जाता है। दरवाजे पर तनकर खड़ी गुडी यानी विजय पताका स्वाभिमान से जीने और जमीन पर लाठी की तरह गिरते ही साष्टांग दंडवत कर जिंदगी के उतार-चढ़ाव में बगैर टूटे उठने का संदेश देती है। गुडी को इस तरह से स्थापित करते हैं कि वह दूर से भी नजर आए। यह समृद्धि का प्रतीक है।

गुड़ी पड़वा के दिन श्रीखंड और पूरन पोली खायी जाती है प्रसाद के रूप में।इस दिन विशेष तौर पर नीम की दातुन एवं नीम की पत्तियां खाने का विधान है। गुड़ी पड़वा के दिन नीम का रसपान किया जाता है। मंदिर में दर्शन करने वाले को नीम और शक्कर प्रसाद के रूप में मिलता है।

॥ गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएँ ॥

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