2020 सावन : महादेव को शीतल करने के लिए इंद्र ने क्यों कराई थी बारिश :

सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। सावन के महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त सावन सोमवार का व्रत करते है। कावंड में गंगाजल भरकर पेदल यात्रा करते है और उस जल से भगवान शिव का अभिषेक करते है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा माना जाता है की भागवान शिव की पूजा करने से जीवन सफल हो जाता है और समस्त प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिलता है।

सावन माह में शिवजी की आराधना से सभी मनोकामनाए पूर्ण होजाती है। ऐसा कहा जाता है की देवो के देव महादेव ने इस सुन्दर श्रुष्टि की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पि लिया था। विष का तापमान इतना अधिक था की इंद्रा देव ने बारिश करके महादेव को शीतल किया था।

पौराणिक कथा :
देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से निकले विष को भागवान शिव ने पि लिया था। इससे शिवजी का शरीर बहुत गरम हो गया था जिससे उनको काफी परेशानी हो रही थी। भागवान शिव को इस परेशानी से बहार निकलने क लिए इंद्र देव ने जमकर वर्षा करवाई थी। ऐसा कहा जाता है की यह घटना सावन माह में घटी थी। तभी से यह मान्यता है की सावन माह में भागवान शिव अपने भक्तो का कष्ट शीघ्रता से दूर कर देते है। यही कारण है की सावन के महीने में उज्जैन , हरिद्वार , वाराणसी , देवघर जैसे अन्य तीर्थ स्थल पर महादेव के भक्तो का सैलाब देखने को मिलता है।

एक अन्य कथा के मुताबिक ऐसा भी माना जाता है की पर्वतराज हिमालय के घर पर देवी सती का माता पार्वती के रूप में दुबारा जन्म हुआ था। माता पार्वती ने सावन के महीने में भगवान शिव को अपना पति बनाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसके पश्चाद माता पार्वती की तपस्या को देखकर भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने माता पार्वती की मनोकामना पूर्ण करी और उनसे विवाह करलिया। सावन माह में ही शिव शंकर ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी माना था इसलिए महादेव को सावन का महीना अति प्रिय है।