आखिर क्यों दिया श्री कृष्ण ने अपनी प्रिय राधा रानी को श्राप; क्या थी इसकी वजह…!!!

धार्मिक कथा (Hindu Mythology Stories)

संसार में जब भी प्यार का नाम लिया जाता है भगवान श्रीकृष्ण और राधा का नाम सबसे पहले लिया जाता है, बल्कि प्रेम की इस पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राधा का नाम श्रीकृष्ण से पहले लिया जाता है।

राधा-कृष्ण
राधा-कृष्ण

इसके अलावा श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियां होने के बाद भी राधा रानी का नाम श्रीकृष्ण के साथ पहले जपा जाता है। कृष्ण अगर शब्द है तो राधा अर्थ है, कृष्ण गीत है तो राधा संगीत है, कृष्ण बंसी है तो राधा स्वर है, कृष्ण समुद्र हैं तो राधा तरंग है, कृष्ण पुष्प हैं तो राधा उस पुष्प की सुगंध है।

राधा जी कृष्ण जी की आल्हादनी शक्ति है। वे दोनों एक दूसरे से अलग है ही नहीं श्री कृष्ण के जीवन में राधा प्रेम की मूर्ति बनकर आईं। जिस प्रेम को कोई नाप नहीं सका, उसकी आधारशिला राधा जी ने ही रखी थी।

राधा-कृष्ण
राधा-कृष्ण

संपूर्ण ब्राह्मंड की आत्मा भगवान कृष्ण हैं और कृष्ण की आत्मा राधा हैं। मनुष्य जब आत्मा को ही नहीं देख पाया तो राधा को देखने का तो सवाल ही उत्पन्न नहीं होता। राधा जी रहस्य थी और रहेंगी।

आज हम आपको एक ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे जिसे पढ़कर आपको बहुत हैरानी होगी।  राधा रानी श्री कृष्ण की प्रिया थी पर ऐसा क्या हुआ की उन्होंने अपने ही प्यार को ही श्राप दे दिया वह कोनसी वजह रही होगी जिसके कारण उनको ऐसा करना पड़ा , तो आइए जानते है पुराणों में वर्णित क्या है वह रहस्य।

राधा-कृष्ण
राधा-कृष्ण

पौराणिक कथा (Indian Mythological Stories)

सृष्टि से पूर्व दिव्य गो लोक धाम में निरंतर रास-विलास करते-करते एक बार श्री राधा जी के मन में एक पुत्र पैदा करने की इच्छा हुई इच्छा होते ही पुत्र की उत्पति हुई। परम सुंदरी का पुत्र भी परम सुंदर हुआ एक दिन उस पुत्र न् जम्हाई ली।

तभी उनके पुत्र के मुख से उस के पंच भूत, आकाश, पाताल, वन, पर्वत,वृक्ष, अहंतत्व, अहंकार, प्रकृति, पुरूष सभी दिखाई दिए उसके मुख में ऐसी आलय बलाय देख कर सुकुमारी श्री राधा रानी को बड़ा बुरा लगा। उन्होंने मन ही मन सोचा कैसा विराट् बेटा हुआ है उन्होंने उसे जल में रख दिया। वही बेटा विराट पुरूष हुआ उसी से समस्त ब्राहमण्डों की उत्पति हुई।

राधा-कृष्ण
राधा-कृष्ण

राधा रानी का अपने पुत्र के प्रति ऐसा व्यवहार देखकर श्री कृष्ण को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने राधा रानी को कहा तुमने अपने पुत्र के साथ ऐसा गलत बर्ताव किया इसलिए में तुम्हें श्राप देता हूँ की अब भविष्य में तुम्हें कभी संतान होगी ही नहीं और इसी वजह से राधा रानी का नाम कृशोदरी पड़ा। इनका पेट कभी बढ़ता ही नहीं।