श्री कृष्णा ने लगाये मोती के पेड़ अभी भी यहाँ मिलते है वो मोती ….

पौराणिक कथा(Mythological Story)

बात तो द्वापरयुग की है लेकिन आज भी राधा(Radha) के बिना  कृष्ण (Krishna) का नाम और कृष्ण(Krishna) के बिना राधा (Radha) का नाम अधूरा ही माना जाता है।

राधा कृष्ण
राधा कृष्ण

आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद आपको बहुत हैरानी होगी लेकिन ऐसी घटनाएं अद्भुत होती हैं, ये पौराणिक (Mythological) इतिहास को वर्तमान समय के साथ बड़ी ही खूबसूरती से जोड़ती हैं। क्या सच में ऐसी जगह है जहाँ भगवान (Bhagwaan) कृष्ण के बोए हुए मोती के पेड़ आज भी मौजूद है। आइये पढ़ते है पूरी कहानी।

धार्मिक कथा (Dharmik Katha)

अधिकांशत: यही पढ़ा और सुना जाता है कि कृष्ण की हजारों रानियों में राधा का नाम शामिल नहीं था। राधा उनकी बस प्रेमिका ही थीं, दोनों का विवाह संभव नहीं हो सका था। लेकिन कहीं-कहीं इस बात का उल्लेख भी मिलता है कि दोनों का विवाह हुआ था और वो भी स्वयं ब्रह्मा जी (Brahma) ने करवाया था।

श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण

बरसाने में रहने वाले संत-महात्मा भी ये बात कहते हैं कि श्रीकृष्ण और राधा के सांसारिक रिश्ते नहीं थे लेकिन गर्ग संहिता, गौतमी तंत्र के अंतर्गत इस बात का वर्णन है कि उन दोनों का विवाह हुआ था। लेकिन इसे प्रमाणिक रूप से कह पाना आज भी किसी के लिए संभव नहीं है।

पुराणों के अनुसार गोवर्धन पर्वत(Goverdhan Parwat) उठाने की घटना के कुछ समय बाद श्रीकृष्ण और राधारानी की सगाई संपन्न हुई थी। सगाई में तोहफे के तौर पर मिले बेशकीमती मोतियों को श्रीकृष्ण ने वहीं जमीन में बो दिया था। तभी से यहां कुछ ऐसे पेड़ उग गए हैं जिनमें से मोती(Moti) निकलते हैं।

श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण

गर्ग संहिता के अनुसार राधा और श्रीकृष्ण की सगाई के दौरान, राधारानी के पिता वृषभानु ने भगवान कृष्ण को तोहफे में बेशकीमती मोती दिए थे।इन मोतियों को तोहफे में पाकर वासुदेव(Vasudev) बहुत परेशान हो गए, उन्हें ये डर सता रहा था कि कि इतने कीमती मोती वो कैसे संभालेंगे।

श्रीकृष्ण अपने पिता की इस चिंता को भांप गए, उन्होंने अपनी मां से झगड़कर वे मोती ले लिए और कुंड(Kund) के पास जमीन में गाड़ दिए। जब नंद बाबा(Nandbaba) को इस बात का पता चला तो वे अपने पुत्र पर बहुत क्रोधित हुए, उन्होंने कुछ लोगों को वह मोती खोदकर लाने के लिए भेजा। लेकिन जब वे लोग जमीन को खोदकर मोती लाने के लिए उस स्थान पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उस जगह पर पेड़(Tree) उग आया है और उस पेड़ पर सुंदर मोती लटक रहे हैं।

पीलू के पेड़ पर मोती लगते हैं
पीलू के पेड़ पर मोती लगते हैं

तब एक बैलगाड़ी में भरकर मोतियों को नंदबाबा के घर पहुंचाया गया। तब से लेकर अब तक उस कुंड को मोती कुंड के ही नाम से जाना जाता है। 84 कोस की गोवर्धन यात्रा के दौरान लोग लोग आज भी यहां लगे पीलू के पेड़ से मोती बटोरने आते हैं।

यूं तो पीलू के पेड़ ब्रज में अन्य भी कई जगह लगे हैं लेकिन केवल यहीं लगे पीलू के पेड़ पर मोती लगते हैं। यात्रा करने वाले लोग इस कुंड(Kund) और कुंड के पास लगे मोतियों के पेड़ को आसानी से देख सकते हैं।

 

॥ प्रेम से बोलो जय श्री राधे ॥

3 Comments