जानिए भगवान गणेश की किस रंग की मूर्ति हरेगी आपके कष्ट :

भगवान गणेश की उपासना में इनकी अलग-अलग रंग की मूर्तियों का प्रयोग होता है । अलग अलग रंग के ये गणपति हर कामना पूरी करने में सक्षम होते है ।
गणेश जी की मूर्ति :
समस्त देवी देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी होते है । इनकी कृपा से हर विघ्न का नाश होता है साथ ही हर कार्य में सफलता मिलती है । शिक्षा से लेकर संतान तक सब कुछ इनकी कृपा से संभव होता है। यहां तक कि मात्र इनकी मूर्ति या चित्र के प्रयोग से भवन के वास्तु दोष को नष्ट किया जा सकता है ।भगवान गणेश की उपासना में इनकी अलग-अलग रंग की मूर्तियों का प्रयोग होता है । अलग अलग रंग के ये गणपति हर कामना पूरी करने में सक्षम होते हैं ।

पीले रंग के गणेशजी :

  • यह छह भुजाधारी होते है तथा इनको हरिद्रा गणपति कहा जाता है ।
  • इनकी घर में मुख्य पूजा स्थल पर स्थापित करना चाहिए ।
  • इनकी उपासना से हर तरह का मंगल होता है घर में सुख शांति और समृद्धि आती है ।

लाल रंग के गणेशजी :

  • लाल रंग के या रक्त वर्ण के कई सारे भगवान गणेश होते हैं ।
  • लेकिन रक्तवर्ण के चार भुजाधारी गणेश जी ही मुख्य रूप से पूजित होते हैं
  • इनको संकष्टहरण गणेशजी कहा जाता है ।
  • इनकी स्थापना या तो अपने पूजा स्थान में या काम के स्थान पर करे ।
  • इनको दूर्वा अर्पित करके प्रार्थना करने से हर संकट टल जाते है ।

सफेद रंग के गणेशजी :

  • इन गणपति जी को शुभ्र गणपति या द्विज गणपति कहा जाता है।
  • यह सफ़ेद रंग के चार भुजाधारी होते हैं।
  • इनकी उपासना से ज्ञान, विद्या तथा बुद्धि का वरदान मिलता है।
  • इनकी स्थापना छात्रों या विद्यार्थियों को अपने पढ़ने के स्थान पर करनी चाहिए ।
  • पढाई और परीक्षा के पहले इनका स्मरण करने से सफलता निश्चित होती है ।

नीले रंग के गणपतिजी :

  • इन गणपतिजी को “उच्छिष्ट गणपति” कहा जाता है, यह नीले रंग के चार भुजाधारी हैं ।
  • इनकी पूजा तंत्र की विशेष पूजा होती है जिसमे शुद्धि अशुद्धि का विचार नहीं होता ।
  • उच्च पद प्राप्ति, कामना सिद्धि तथा तंत्र मंत्र से बचाव के लिए इनकी उपासना विशेष होती है ।
  • बिना किसी सदगुरु के निर्देशन के इनकी उपासना नही करनी चाहिए ।

ऋण मोचन गणेशजी :

  • इन गणपतिजी का वर्ण पीला ही होता है ।
  • परन्तु ये चार भुजाधारी होते हैं तथा लाल रंग का वस्त्र धारण करते हैं ।
  • इनको अपने कार्य स्थल पर स्थापित करना चाहिए ।
  • नियमित रूप से इनके सामने घी का दिया जलाएं ।
  • कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें, जिससे लाभ होगा ।

महागणपति

  • यह गणेश जी समस्त स्वरूपों को अपने अंदर समाहित रखते हैं ।
  • यह त्रिनेत्रधारी , रक्तवर्ण के तथा दस भुजाधारी होते हैं ।
  • गणेश महोत्सव के अवसर पर या मंदिर में ही इनकी उपासना श्रेष्ठ मानी जाती है ।
  • गणेश महोत्सव में इनका स्मरण और दर्शन पूजन करने से संतान का वरदान सरलता से मिलता है ।