जरूर पढ़िए किस व्यक्ति का किस दिन करना चाहिए श्राद्ध..!!!

 पितृपक्ष के दौरान तर्पण
पितृपक्ष के दौरान तर्पण

मान्यता है कि जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि में श्राद्ध करना चाहिए।आज हम आपको बता रहे है कि किस दिन किसका श्राद्ध करना चाहिए। पितृपक्ष को लेकर मान्यता है कि इन दिनों पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृपक्ष में नदी, तालाब एवं पोखरों में पितरों की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। यह परंपरा काफी समय से चल आ रहा है। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान तर्पण नहीं करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति नहीं मिलती

है। अब पढ़िए किस व्यक्ति का किस दिन श्राद्ध करना चाहिए:

  • दादी और नानी का श्राद्ध आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा के दिन करने का विधान है।
  • सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है।

  • कभी- कभी ऐसा होता है कि हमें अपने पूर्वज की मृत्यु का दिन नही पता होता तो वह श्राद्ध अमावस्या के दिन करें,क्योंकि इस दिन सर्वपितृ अमावस्या होती है।
  • किसी दुर्घटना से हुई अकाल मृत्यु या ब्रह्माणघाती व्यक्ति का श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। कुत्ता, सर्प आदि के काटने का श्राद्ध चौदस तिथि में करनी चाहिए।

  • संन्यासी व्यक्ति का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है।
  • पितृपक्ष में इसका काफी महत्व है। पितृपक्ष में दान का विशेष महत्व बताया गया है।

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