भोलेनाथ की इस गुफा में छिपा है कलयुग के अंत का रहस्य!!!!जानिये

शिव की इस गुफा में छिपा है कलयुग के अंत का रहस्य!!!!

स्कंद पुराण के अनुसार उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में गंगोलीहाट कस्बे में स्थित इस पाताल भुवनेश्वर गुफा के विषय में कहा गया है कि इसमें भगवान शिव का निवास है। सभी देवी-देवता इस गुफा में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति करते हैं। यह गुफा पहाड़ी के करीब 90 फीट अंदर है। यह उत्तराखंड के कुमाऊं में अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी. की दूरी तय करके पहाड़ी के बीच बसे गंगोलीहाट कस्बे में है। पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य या किसी अजूबे से कम नहीं है।

 पाताल भुवनेश्वर गुफा
पाताल भुवनेश्वर गुफा

सृष्टि की रचना से लेकर कलयुग का अंत कब और कैसे होगा इसका पूरा वर्णन भी यहां पर है। यहां पत्थरों से बना एक- एक शिल्प तमाम रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। मुख्य द्वार से संकरी फिसलन भरी 80 सीढियां उतरने के बाद एक ऐसी दुनिया नुमाया होती है जहां युगों युगों का इतिहास एक साथ प्रकट हो जाता है। गुफा में बने पत्थरों के ढांचे देष के आध्यात्मिक वैभव की पराकाष्ठा के विषय में सोचने को मजबूर कर देते हैं।

कैसे दिखती है गुफा

गुफा के संकरे रास्ते से जमीन के अंदर आठ से दस फीट अंदर जाने पर गुफा की दीवारों पर शेषनाग सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकृति नज़र आती है। गुफा की शुरुआत में शेषनाग के फनों की तरह उभरी संरचना पत्थरों पर नज़र आती है। मान्यता है कि धरती इसी पर टिकी है।

 भगवान शिव का निवास
भगवान शिव का निवास

इस गुफा में चार खंभा है जो चार युगों अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों में कोई परिवर्तन नही होता। जबकि कलियुग का खंभा लम्बाई में अधिक है और उस खंबे के ऊपर छत से एक पिंड नीचे लटक रहा है। जिसके बीच की दूरी महज बहुत कम बची है।

कब होगा कलयुग का अंत, बतायेगा पाताल भुवनेश्वर में स्थित “खम्बा” –

इस गुफा के पुजारियों का कहना है कि 7 करोड़ वर्षों में यह पिंड 1 ईंच बढ़ता है। और इसके बारे में मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड कलियुग के खंभे से मिल जाएगा उस दिन महाप्रलय आ जाएगा और कलियुग समाप्त हो जायेगा।

कलयुगी पत्थर
कलयुगी पत्थर

गुफा का पौराणिक महत्व:- 

इस गुफा को त्रेता युग में राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले देखा। द्वापर युग में पाण्डवों ने यहां चौपड़ खेला और कलयुग में जगदगुरु शकराचार्य का 833 ई के आसपास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित किया। इसके बाद चन्द राजाओं ने इस गुफा के विषय मे जाना और आज यहाँ देश विदेश से सैलानी आते हैं एवं गुफा के स्थपत्य को देख दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाते हैं।

 पाताल भुवनेश्वर गुफा
पाताल भुवनेश्वर गुफा

ये एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर चारों धामों के दर्शन एक साथ होते हैं। शिवजी की जटाओं से बहती गंगा की धारा यहां नजर आती है तो अमृतकुंड के दर्शन भी यहां पर होते हैं। ऐरावत हाथी भी आपको यहां दिखाई देगा और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्ग का मार्ग भी यहां से शुरू होता है।

 

कलयुग का अंत
कलयुग का अंत

 

Patal bhuvneshwar cave
Patal bhuvneshwar cave

 

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