कब करें काल भैरव की पूजा जिससे मिले आपको मनचाहा फल …….

शास्त्रों के अनुसार इस दिन कालभैरव का दर्शन एवं पूजन मनवांछित फल प्रदान करता है!!!

भगवान भोलेनाथ के भैरव रूप के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं। भैरव की पूजा व उपासना से मनोवांछित फल मिलता है। अत: भैरव जी की पूजा-अर्चना करने व कालाष्टमी के दिन व्रत एवं षोड्षोपचार पूजन करना अत्यंत शुभ एवं फलदायक माना गया है।शास्त्रों के अनुसार इस दिन कालभैरव का दर्शन एवं पूजन मनवांछित फल प्रदान करता है।

काल भैरव
काल भैरव

कब आती है कालाष्टमी

कालाष्टमी का त्यौहार हर माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।इस दिन कालभैरव की पूजा की जाती है जिन्हें शिवजी का एक अवतार माना जाता है। इसे कालाष्टमी, भैरवाष्टमी आदि नामों से जाना जाता है। आज के दिन मां दुर्गा की पूजा और व्रत का भी विधान माना गया है।

कालाष्टमी व्रत विधि

 शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी के दिन कालभैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इस रात देवी काली की उपासना करने वालों को अर्ध रात्रि के बाद मां की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए जिस प्रकार नवरात्रि मे दुर्गा पूजा की सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रिकी पूजा का विधान है।  इस दिन पुरी श्रद्धा के साथ रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए।कालाष्टमी के दिन जो व्रत करता है उसे फलाहार ही करना चाहिए।जैसा की हम सब जानते है कि काल्भैरव का वाहन कुत्ता, जिस पर वे सवारी करते है।उसको कालाष्टमी के दिन भोजन करवाने से कालभैरव प्रस्सन होते है ।

क्यों रखा जाता है कालाष्टमी का व्रत
कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा और विष्णु विवाद उत्पन्न हुआ।विवाद का कारण था कि कौन सबसे श्रेष्ठ है। विवाद के समाधान के लिए सभी देवता और मुनि शिव जी के पास पहुंचे। सभी देवताओं और मुनि की सहमति से शिव जी को श्रेष्ठ माना गया।परंतु ब्रह्मा जी इस बात से सहमत नहीं हुए।ब्रह्मा जी, शिव जी का अपमान करने लगे।अपमान जनक बातें सुनकर शिव जी को क्रोध आ गया जिससे कालभैरव का जन्म हुआ।उसी दिन से कालाष्टमी का पर्व शिव के रुद्र अवतार कालभैरव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा।

कालाष्टमी व्रत फल
कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायीऔर शुभ माना जाता है। इस दिन पुरे भक्ति भाव के साथ व्रत रखकर ,पूरे सच्चे मन से और विधि-विधान से काल भैरव की पूजा और अर्चना करने से व्यक्ति के सारे कष्ट और दुख मिट जाते हैं ।काल उससे दूर हो जाता है।इसके अलावा व्यक्ति रोगों से दूर रहता है और उसे जीवन के  हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

इस मंत्र का करें जाप
शिव पुराण में कहा है कि भैरव परमात्मा शंकर के ही रूप हैं इसलिए,कहा जाता है कि इस दिन इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!

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