जानिए, सुंदरकांड की कुछ बातें जिनसे आज भी है आप अनजान… !!

सुंदरकांड करने से आपकी सभी समस्याओ का समाधान हो जाता हे| सुंदरकांड करने से हनुमानजी आपसे सदेव प्रसन्न रहते हे| इस पाठ को केवल मंगलवार के दिन करने से ही इसका फल मिलता हे| सुंदरकांड करने से मनुष्य को मानसिक लाभ भी होता हे| बजरंगबली अपने भक्तो से बहुत ही जल्द प्रसन्न हो जाता हे और उन्हें  प्रसन्न करे का एक मात्र स्त्रोत्र सुंदरकांड ही हे|

इस पाठ को क्यों कहा गया ‘सुंदरकांड’ ?

जब सीताजी की खोज में हनुमानजी त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी लंका में गये थे| यहां 3 पर्वत थे पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था| दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका थी| यहा पर ही माँ सीता और हनुमानजी के भेट हुई थी| इस कांड की यही सबसे प्रमुख घटना थी इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया है|

क्यों शुभ अवसरों पर ही किया जाता हे सुंदरकांड

शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है| सुंदरकांड का शुभ कार्यो की शुरुआत में विशेष महत्त्व हे| यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हो या उसे कोई धन सम्बन्धी परेशानी हो, आत्मविश्वास की कमी हो या उसके जीवन और कोई समस्या हो वो सुंदरकांड का पाठ करने से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं| यदि आप किसी ज्योतिष से भी समस्याओ के समाधान की बात करोगे तो वो भी कही न कही आपको सुंदरकांड का पाठ करने की ही सलाह देंगे|

सुंदरकांड से मिलता हे मानसिक लाभ

सुंदरकांड श्री राम भक्त हनुमान जी की विजय का एकमात्र अध्याय हे| मनोवेग्यानिक नजरिये से देखा जाये तो इस पाठ को करने से इच्छाशक्ति बढती हे| सुंदरकांड करने से किसी भी कार्य को करने में आत्मविश्वास मिलता हे और साथ ही मानसिक शक्ति भी प्राप्त होती हे|

सुंदरकांड से मिलता है धार्मिक लाभ

सुंदरकांड का पाठ से धार्मिक लाभ जरुर मिलता हे| सुंदरकांड का पाठ बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिये किया जाता हे| बजरंगबली बहुत जल्द ही अपने भक्त से प्रसन्न हो जाते हे| हनुमानजी की पूजा को मनोकामना पूर्ण करने वाली माना जाता हे|

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