अगर करते है सुबह पूजा तो जान लें इस मंत्र के बिना अधूरी रह जाती है आपकी पूजा..!!!जरूर पढ़े..!!!

हमारे शास्त्रों में पूजा को लेकर विशेष महत्व बताया गया है और स्कन्द पुराण के अनुसार पूजा के बाद आरती करना जरुरी है और बहुत महत्वपूर्ण भी है।जिस दिन जिस भी भगवान की पूजा हो उसके बाद उनकी आरती करना बेहद जरूरी माना गया है तभी कोई पूजा पूर्ण रूप से सफल होती है। लेकिन क्या आप जानते है आरती के अलावा एक चीज और भी है जिसे आपको आरती के ठीक बाद करना चाहिए ।

इस मंत्र को न लेने से आपकी आरती पूर्ण नहीं हो सकती है ।हिंदू धर्म में पूजा के दौरान मंत्रों के उच्चारण का विशेष महत्व माना गया है। सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं और इनके लाभ और फायदे भी अलग होते हैं।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।

मंत्र का अर्थ

कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।

करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।

संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।

भुजगेंद्रहारम्- इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।

सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है।

मंत्र का पूरा अर्थ- जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है।

पुराणों में उल्लेख मिलता है जैसे किसी भी पूजा के पहले भगवान गणेश की स्तुति की जाती है।वैसे ही किसी भी देवी-देवता की आरती के बाद कर्पूरगौरम् करुणावतारं मंत्र का जाप करने का अपना महत्व है।दरअसल भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णु द्वारा गाई हुई मानी गई है। शिव शंभू की इस स्तुति में उनके दिव्य रूप का बखान किया गया है। शिव को जीवन और मृत्यु का देवता माना गया है। इसलिए इस मंत्र का जाप कभी व्यर्थ नहीं जाता।

इस मंत्र को आरती के बाद लेना बेहद आवश्यक है और इसके बिना आपकी आरती पूरी हो ही नहीं सकती।तो अब से ये ध्यान रखिये की पूजा के बाद आरती और आरती के बाद ये सिद्ध मंत्र लेना न भूले।

 

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