जानिए हरियाली तीज पर मेहँदी लगाने की परंपरा की यह खास वजह :

हरियाली तीज का त्यौहार महिलाओ के सुहाग से जुड़े सभी त्योहारों में सबसे अहम माना जाता है। सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरियाली तीज मनाई जाती है । हरियाली तीज को कुछ स्थानों पर कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि इस वर्ष कोरोना के चलते सभी त्योहारों का रंग फीका पड़ रहा है मगर मेहँदी के रंग इस त्यौहार की संस्कृति और धरोहर को और भी चटक मना देते है। आइए जानते है हरियाली तीज पर मेहँदी लगाने की खास वजह :-

हमारी प्राचीन संस्कृति में त्योहारों को धूमधाम से मानाने की परंपरा है और इन्ही त्योहारों की खूबसूरती महिलाओ के सोलहशृंगार से बढ़ती है। मेहँदी सोलह श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है। मान्यताओं के मुताबिक़ जो भी महिलाए इस दिन अपने हाथो को मेहँदी लगाकर सजाती है , उसका दाम्पत्य जीवन समृद्ध बनता है। इसलिए इस दिन सभी महिलाए अपने हाथो और पेरो में मेहँदी लगाना शुभ मानती है। तीज के त्यौहार में मेहँदी लगाने का बहुत बड़ा महत्व होता है। इस दिन सुहागन महिलाए अपने मायके जाकर मेहँदी लगाती है और झूले झूलती है।
मेहँदी लगाने का ज्योतिष से सम्बन्ध :

हरियाली तीज के त्यौहार से एक दिन पहले मेहँदी लगाई जाती है। मेहँदी लगाने से बुध और शुक्र गृह अति बलवान होते है। कुछ लोग तो मेहँदी के पत्तो को पीसकर सर , पंजो , हथेली और तलवो पर लगाते है। मेहँदी से जो शीतलता महसूस होती है वह शांति का अनुभव कराती है। मेहँदी लगाने से महिलाए शांत रहती है और उनका चिड़चिड़ापन दूर होता है।

माता पार्वती ने भी लगाई थी मेहँदी :
मेहँदी लगाने की परम्परा तो पौराणिक काल से चली आरही है। शिवपुराण में एक कथा में मिलता है की माता पार्वती ने मेहँदी रचाकर भोलेबाबा को आकर्षित किया था। मेहँदी का रंग और खुशबू भगवान शिव को माता पार्वती की और ले गया। इसीलिए तीज के दिन सभी महिलाए माता पार्वती की तरह अपने हाथो में मेहँदी लगाती है की उनका प्रेम अपने पति के साथ अमिट बना रहे।