हरयाली अमवस्या 2020 : जानिये व्रत कथा , महत्व , मुहर्त !!!

मान्यताओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन पीपल के मूल भाग में जल , दूध पितृ तृप्त होते है और शाम के समय सरसो के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव शांत रहते है। सोमवार के दिन आने वाली अमवस्या को सोमवती अमवस्या के नाम से जाना जाता है।
हरियाली अमवस्या महत्व
हरियाली अमवस्या जैसा की नाम से स्पष्ट होता है की यह दिन हरियाली को समर्पित होता है । सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमवस्या को हरियाली अमवस्या के दिन से जाना जाता है। इस अमवस्या का सम्बन्ध सीधा प्रकृति , पितृ और भगवान शंकर से है। इस दिन पौधरोपण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है क्योकि सनातन धर्म में वृक्षों को देवता स्वरुप माना गया है।

हरियाली अमवस्या का मुहर्त :
प्रारम्भ समय – हरियाली अमवस्या का प्रारम्भ 19 जुलाई रात 12 बजकर 10 मिनट से होगा जो अगले दिन 20 जुलाई को रात 11 बजकर 1 मिनट होगा। आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना है। सर्वार्थ सिद्धि योग रात 9 बजकर 21 मिनट से अगले दिन 21 जुलाई को सुबह 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
हरियाली अमवस्या व्रत कथा :
एक राजा था , उसके बेटा बहु थे। एक दिन बहु ने चोरी करके मिठाई खाली और चोरी का इलज़ाम चूहे पर लगा दिया। यह सुनकर चूहे को ग़ुस्सा आया और उसने ठान लिया की चोर को राजा के सामने पेश करूँगा।
एक दिन राजा के घर में मेहमान आये थे। वह सब राजा के कमरे सोये थे। चूहे ने रानी के कपडे लेजाकर राजा के कमरे में रख दिए। प्रातः काल में सब लोग आपस में बात करने लगे की छोटी रानी के कपडे राजा जी के कमरे में मिले। यह बात सुनकर राजा ने रानी को घर से निकाल दिया। वह रोज़ शाम के समय दिया जलती थी और ज्वार बोती थी साथ ही पूजा करती और गुड़धानी का प्रसाद बाटती थी। एक दिन जब राजा उधर से निकले तब उनकी नज़र रानी पर पड़ी। राजा ने अपने सेनिको को बुलाया और देखने को कहा।

अगले दिन जब राजा के सेनिको ने पेड़ पर चढ़ के देखा तो पता चला की दिए आपस में बात कर रहे थे। उसमे से एक दिया बोला में राजा के घर का हूँ , उस राजा की बहु ने एक बार चोरी करके मिठाई खाली थी और चूहे का नाम ले लिया था और जब चूहे को ग़ुस्सा आया तो रानी के कपडे राजा के कमरे में जाके रख दिए , यह जानकर राजा ने रानी को घर से भर निकल दिया। तब से वह रोज़ मेरी पुजा करती थी और भोग लगाती थी।
उसने रानी को आशीर्वाद दिया की वह सुखी रहे। इसके बाद पेड़ पर से उतर कर सैनिक घर आए और बताया की रानी का कोई दोष नहीं था। राजा ने यह जानकर रानी को घर बुला लिया और सभी सुखी से रहने लगे।