जानिये कैसे भगवान शिव जी के हठ की वजह से हुआ हरी और हर का अद्भुत मिलन..!!!

पौराणिक कथा (indian mythological story)

प्रभु की लीला निराली है वो जो भी करते है उनमें उनका कोई न कोई सन्देश जरूर छुपा रहता है। आज हम आपको ऐसे ही एक व्याख्या के बारे में बता रहें है जब जगत के संहारक देवों के देव महादेव (हर) और जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण (हरी) हो गए थे एक।

 जगत के संहारक देवों के देव महादेव
जगत के संहारक देवों के देव महादेव

तो आइये पढ़िए ये अद्भुत कथा और आनंद लीजिये प्रभु की लीला का।

एक बार भगवान शंकर के मन में भी विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के बालस्वरूप के दर्शन करने की इच्छा हुई। भादौ शुक्ल द्वादशी के दिन भगवान शंकर अलख जगाते हुए गोकुल में आए। शिव जी द्वार पर आकर खड़े हो गए।

जगत के पालनहार भगवान विष्णु
जगत के पालनहार भगवान विष्णु

तभी नन्द भवन से एक दासी शिवजी के पास आई और कहने लगी कि यशोदाजी ने ये भिक्षा भेजी है इसे स्वीकार कर लें, और नन्दलाल को आशीर्वाद दे दें। शिव बोले मैं भिक्षा नहीं लूंगा, मुझे किसी भी वस्तु की अपेक्षा नहीं है, मुझे तो लड्डू गोपाल के दर्शन करना है।

दासी ने यह समाचार यशोदाजी को पहुंचा दिया,”अरी मईया!  देखा दे मुख लाल का, तेरे पलने में, पालनहार देखा दे मुख लाल का “यशोदाजी ने खिड़की में से बाहर देखकर कह दिया कि लाला को बाहर नहीं लाऊंगी, तुम्हारे गले में सर्प है जिसे देखकर मेरा लाल डर जाएगा।

हरी और हर हुए एक
हरी और हर हुए एक

शिवजी बोले कि माता तेरा कन्हैया तो काल का काल है, ब्रह्म का ब्रह्म है, वह किसी से नहीं डर सकता, उसे किसी की भी कुदृष्टि नहीं लग सकती और वह तो मुझे पहचानता है।

यशोदाजी बोलीं-कैसी बातें कर रहे हो आप? मेरा लाल तो नन्हा सा है आप हठ न करें। शिवजी ने कहा- तेरे लाला के दर्शन किए बिना मैं यहां से नहीं जाऊंगा और अगर दर्शन न हुए तो मै यही समाधी लगा लूँगा।

कान्हा माँ यशोदा के साथ
कान्हा माँ यशोदा के साथ

बाल कन्हैया सब अंदर से सुन रहें थे उन्होंने सोचा कि शिवजी पधारे हैं, और अगर मैया मुझे वहां ले नहीं जाएंगी,तो महादेव दर्शन न मिलने पर समाधी लगा लेगे। क्योकि कन्हैया जानते थे कि भोले बाबा कि समाधी लग गई तो हजारों वर्ष के बाद ही खुलेगी इससे बचने के लिए उन्होंने जोर-जोर से रोना शुरु किया।

जब कन्हैया किसी भी प्रकार चुप नहीं हुए तो माता को लगा कि सचमुच वे योगी परम तपस्वी है। यशोदाजी बालकृष्ण को बाहर लेकर आई। शिवजी ने सोचा कि अब कन्हैया मेरे पास आएंगे, शिवजी ने दर्शन करके प्रणाम किया किन्तु इतने से तृप्ति नहीं हुई। वे अपनी गोद में लेना चाहते थे।

हरी और हर हुए एक
हरी और हर हुए एक

शिवजी यशोदाजी से बोले कि तुम बालक के भविष्य के बारे में पूछती हो, यदि इसे मेरी गोद में दिया जाए तो मैं इसकी हाथों की रेखा अच्छी तरह से देख लूंगा। यशोदा ने बालकृष्ण को शिवजी की गोद में रख दिया और इस तरह हुआ हरी से हर का मिलन, हरी और हर हो गए एक।

 

॥ प्रेम से बोलो जय श्री राधे ॥

 

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