अनोखा गाँव जहाँ नहीं होती है हनुमान जी की पूजा…!!जरूर पढ़े..!!

अनोखा गाँव जहाँ नहीं होती है हनुमान जी की पूजा…!!जरूर पढ़े..!!

उत्तराखंड का द्रोणागिरी गाँव
उत्तराखंड का द्रोणागिरी गाँव

हनुमान जी हिन्दुओं के प्रमुख देव हैं और उनके देश भर में अनेकों मंदिर हैं।महावीर की महिमा के बारे में किसी को बताने की जरूरत नहीं है। हिन्दू धर्म मानने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके प्रिय महावीर ना हों। हनुमान जी अपने भक्तों की हमेशा सहायता करते हैं। हनुमान जी के हर मंदिर में हजारों लोग जाते है और मनोकामना मांगते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हनुमान जी हम हिन्दुओं के आराध्य देव हैं और सभी हिन्दु लोग उनकी पूजा करते हैं। हनुमान जी से भूत-पिचाश, रोग सभी डरते हैं। जो भक्त सच्चे मन से आराधना करता है, उसे इन सभी चीजों का जरा भी डर नहीं होता है।  पूरे देश में हनुमान जी की पूजा की जाती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में एक ऐसा भी गांव है, जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है। उस गांव के लोगों को हनुमान जी की पूजा करने की अनुमति नहीं है। ऐसा क्यों होता है आइये जानते हैं। वैसे इस गांव के लोगों की राम जी से कोई नाराजगी नहीं है। राम की पूजा बड़ी ही श्रद्धा भक्ति से करते हैं।

ये गाँव है उत्तराखंड का द्रोणागिरी गाँव ,यहाँ पूजा निषेध इसलिए है क्योकि यहाँ के निवासी हनुमान जी के द्वारा किये गये एक काम से आज तक रुष्ट है।यह गाँव उत्तराखंड के सीमान्त जनपद चमोली के जोशीपीठ प्रखंड में जोशीमठ नीतिमार्ग मार्ग पर लगभग 14000 फुट की ऊँचाई पर स्थित है lयहाँ रहने वाले लोगो की मान्यता है कि रामायण युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी को सही करने लिए जिस पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए हनुमान जी उठाकर लेकर गये थे, वो यही पर स्थित था l जैसा कि द्रोणागिरी के निवासी उस पर्वत को देव स्वरुप मानकर उसकी पूजा अर्चना किया करते थे, तो वे हनुमान जी के पर्वत उठाकर ले जाने से नाराज हो गये l यही कारण है कि आज भी इस गाँव में हनुमान जी की पूजा नही होती l रुष्ट होने ही पराकाष्ठा इस कदर है कि इस गाँव में लाल रंग का झंडा तक लगाने पर पाबंदी है।

उत्तराखंड का द्रोणागिरी गाँव
उत्तराखंड का द्रोणागिरी गाँव

बताते है कि जिस वृद्ध महिला ने हनुमान जी की संजीवनी का पता बताने में मदद की उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया l आज भी इस गाँव के आराध्य देव पर्वत की खास पूजा पर यहाँ के लोग महिलाओ के हाँथ का दिया कुछ भी नही खाते और  न ही महिलाओं को इस पूजा में शामिल होने की अनुमति है।

 

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