जानिए दशहरे पर हनुमान जी को क्यों चढ़ता है पान का बीड़ा और क्यों है पान खाने की परंपरा..!!!

आज विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है । असत्य पर सत्य की जीत का सबसे बड़ा त्यौहार पूरे देश में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है । सैकड़ों वर्षों से आज के दिन अस्त्र-शस्त्र का पूजन और रावण दहन के बाद बड़ो के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है ।वहीँ इसी तरह की कई परम्पराएं हैं जो इस दिन की जाती है । इनमें से एक है, आज के दिन पान का बीड़ा हनुमानजी के चढ़ाना और उसके बाद इसे खाना ,

ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि पान हनुमाजी को बहुत पसंद है और पान चढ़ाने से वे बहुत प्रसन्न हो जाते है और भक्त की सभी मनोकामनाओ को पूरी करते है ।

दशहरे के दिन पान का महत्व

पान को जीत का प्रतीक माना गया है । पान का ‘बीड़ा’ शब्द का एक महत्व यह भी है । इस दिन हम सही रास्ते पर चलने का ‘बीड़ा’ उठाते हैं ।  पान प्रेम का पर्याय है ।दशहरे में रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने की परम्परा है । ऐसा माना जाता है दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं ।

शुभ कामों में पान का महत्व

जानकार कहते हैं कि पान का पत्ता मान और सम्मान का प्रतीक है । इसलिए हर शुभ कार्य में इसका उपयोग किया जाता है । पान के पत्ते का उपयोग विवाह से लेकर कथा पाठ तक हर शुभ काम में किया जाता है ।

बीमारियों से रक्षा करता है पान

वैज्ञानिक नज़र से देखें तो शारदीय नवरात्रि के समय मौसम बदल रहा होता है । इस समय संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है । ऐसे में यह परम्परा लोगों की बीमारियों से रक्षा करती है । नौ दिन के उपवास के बाद लोग अन्न ग्रहण करते हैं जिसके कारण उनकी पाचन की क्रिया प्रभावित होती है । पान का पत्ता पाचन की प्रक्रिया को सामान्य बनाए रखता है ।

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