हनुमान जी ने रची अपनी लीला और उठाना पड़ा श्री कृष्ण को गोवर्धन पर्वत; पढ़ें अद्भुत प्रसंग…!!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

कृष्ण (Krishna) भगवान की अनेक लीलाओ के बारे में तो आप जानते ही है।

कैसे इंद्र (Indra) के अहंकार को चूर करने के लिए और उनके कोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण (Krishna) ने गोवर्धन (Goverdhan) को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था।

श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये पर्वत को अपनी चींटी अंगुली पर उठाया
श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये पर्वत को अपनी चींटी अंगुली पर उठाया

परन्तु क्या आप जानते है इस घटना के पीछे हनुमान (Hanuman) जी का हाथ था।

जी हाँ बहुत कम लोग इस बात को जानते है, तो आइए आज जानते हैं कि हनुमान (Hanuman) जी ने ऐसा क्या किया कि श्री कृष्ण को गोवर्धन (Goverdhan) पर्वत उठाना पड़ा।

हनुमान जी ने उठाया गोवर्धन पर्वत

त्रेतायुग में जब विष्णु (Vishnu) जी ने श्री राम (Ram) का अवतार लिया था।

तब उन्हें लंका (Lanka) तक पहुँचने के लिए वानर सेना की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण करना पड़ा था।

हनुमान जी ने उठाया गोवर्धन पर्वत
हनुमान जी ने उठाया गोवर्धन पर्वत

उस समय सेतु पुल के लिए बहुत सारे पत्थरों की आवश्यकता थी।

इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए हनुमान (Hanuman) जी हिमालय पर गये।

वहां पहुँच कर उन्होंने एक बड़ा सा पर्वत उठा लिया और समुद्र की ओर चल पड़े।

मार्ग में उन्हें पता चला कि सेतु का निर्माण पूरा हो चूका है।

हनुमान जी ने उठाया गोवर्धन पर्वत
हनुमान जी ने उठाया गोवर्धन पर्वत

यह पता चलने पर उन्होंने पर्वत को वहीं जमीन पर रख दिया।

धार्मिक कथा ( Religious Story)

यह देखकर पर्वत निराश हो गया और उसने हनुमान (Hanuman) जी से कहा कि मैं न तो श्री राम (Ram) के काम आया और न अपने स्थान पर रह सका।

पर्वत को इस तरह निराश देखकर हनुमान (Hanuman) जी ने कहा कि द्वापर में भगवान श्री राम (Ram) फिर से अवतार लेंगे।

उस समय वह श्री कृष्ण (Krishna) के रूप में आपको अपनी उंगली पर उठा कर देवता के रूप में प्रतिष्ठित करेंगे।

और कलियुग (Kaliyug) में लोग तुम्हारी पूजा करेंगे ।

गोवर्धन पर्वत
गोवर्धन पर्वत

इसी भविष्यवाणी के कारण श्री कृष्ण (Krishna) ने गोवर्धन (Goverdhan) को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था।

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को गोर्वधन (Goverdhan) रूप में अपनी पूजा किए जाने की बात कही थी।

गोवर्धन (Goverdhan) पर्वत को गिरिराज (Giriraj) महाराज के नाम से जाना जाता है।

इन्हें साक्षात श्री कृष्ण (Krishna) का स्वरूप माना गया है।

 

॥जय श्री कृष्ण॥
॥जय हनुमान॥

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