हनुमान जी ने लंका से भेजा तो यहां गिरे शनिदेव, मौजूद हैं गिरने के निशान!!!

हनुमान जी ने लंका से भेजा तो यहां गिरे शनिदेव, मौजूद हैं गिरने के निशान!!!

यह तो आपने सुना ही होगा कि जिस पर पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा होती है, उस पर शनिदेव भी अवश्य कृपा करते हैं। और हनुमानजी के भक्त पर शनिदेव कभी भी अपनी कुदरस्ती नहीं रखते है। यूं तो शनिदेव और हनुमानजी के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं। उनमें से एक मध्यप्रदेश में ग्वालियर के समीप एंती गांव में स्थित शनिदेव का मंदिर बहुत माना जाता है।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर के नजदीकी एंती गांव में शनिदेव मंदिर का देश में विशेष महत्व है। देश के सबसे प्राचीन त्रेतायुगीन शनि मंदिर में प्रतिष्ठत शनिदेव की प्रतिमा भी विशेष है। माना जाता है कि ये प्रतिमा आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है। ज्योतिषी व खगोलविद मानते है कि शनि पर्वत पर निर्जन वन में स्थापित होने के कारण यह स्थान विशेष प्रभावशाली है। महाराष्ट्र के सिगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई है।

 

त्रेतायुग में आकर विराजे थे शनिदेव

मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां त्रेतायुग से ही शनिदेव की प्रतिमा विराजमान है। इसका निर्माण आसमान से गिरे उल्कापिंड से हुआ है। एवं इस शनि मंदिर का निर्माण विक्रमादित्य ने करवाया था। बाद में कई शासकों ने इसका जीर्णोद्धार भी करवाया।

शनिदेव के लंका से आकर गििरने से बना गड्ढा
शनिदेव के लंका से आकर गिरने से बना गड्ढा

महाबली हनुमान ने यहां भेजा था शनिदेव को

पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि रावण ने एक बार शनिदेव को भी कैद कर लिया था। तब शनिदेव ने हनुमानजी को कहा था कि अगर वे उन्हें यहाँ से छुड़ा लेते है तो वे रावण के नाश में अहम भूमिका निभाएंगे।और फिर शनिदेव को हनुमानजी ने रावण की कैद से मुक्त कराया। कैद में रहने से शनिदेव काफी कमजोर हो चुके थे। इसलिए उन्होंने हनुमान जी से एक सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रार्थना की। और इसी तरह हनुमानजी ने अपने बल पूर्वक से शनिदेव को आकाश में उछाल दिया और वे यहां आ गए।

आज भी मौजूद हैं उल्कापात के निशान

जब हनुमान जी के प्रक्षेपित शनिदेव यहां आ कर गिरे तो उल्कापास सा हुआ। शिला के रूप में वहां शनिदेव के प्रतिष्ठत होने से एक बड़ा गड्ढा बन गया, जैसा कि उल्का गिरने से होता है। ये गड्ढा आज भी मौजूद है!

 

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