महाभारत काल के महान गुरु द्रोणाचार्य का कैसे हुआ था जन्म,जरूर पढ़े…!!!

महाभारत के एक प्रमुख पात्र गुरु द्रोणाचार्य
महाभारत के एक प्रमुख पात्र गुरु द्रोणाचार्य

महाभारत के एक प्रमुख पात्र थे गुरु द्रोणाचार्य। जिन्होंने कौरवों व पांडवों को अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा दी थी। द्रोणाचार्य महर्षि भारद्वाज के पुत्र थे। आज जानते है कैसे हुआ था गुरु द्रोणाचार्य का जन्म । कथा के अनुसार एक बार महर्षि भारद्वाज जब सुबह गंगा स्नान करने गए, वहां उन्होंने घृताची नामक अप्सरा को जल से निकलते देखा। यह देखकर उनके मन में विकार आ गया और उनका अश्रु गिरने लगे। यह देखकर उन्होंने अपने अश्रु को द्रोण

नामक एक बर्तन में एकत्रित कर लिया। कहा जाता है उसी में से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ था। महर्षि भारद्वाज ने पहले ही आग्नेयास्त्र की शिक्षा अपने शिष्य अग्निवेश्य को दे दी थी। अपने गुरु के कहने पर अग्निवेश्य ने द्रोण को आग्नेय अस्त्र की शिक्षा दी।

जब द्रोणाचार्य शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब उन्हें पता चला कि भगवान परशुराम ब्राह्मणों को अपना सर्वस्व दान कर रहे हैं। द्रोणाचार्य भी उनके पास गए और अपना परिचय दिया। द्रोणाचार्य ने भगवान परशुराम से उनके सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्र मांग लिए और उनके प्रयोग की विधि भी सीख ली।

 

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