अगर इन 15 नियमो को ध्यान मे रख करेंगे रोज़ घर की पूजा तो भाग जाएगी घर की दरिद्रता और बनेंगे बिगड़े काम !!

हम अनजाने में पूजा करने में कई ऐसी गलतियां कर देते हैं जिसका हमें आभास तक नहीं होता है उसी के बारे में आज मैं आपको बताने जा रही हूं जिसे अपनाकर अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं। अपने परिवार में सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी-देवताओं की पूजा करने की परंपरा अनेकों वर्षों से चली आ रही है और आज भी हम इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। हमें पूजा का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो इसलिए पूजा में होने वाली गलतियों के बारे में बताने जा रही हूं। आज हम आपको ऐसे नहीं हम बताने जा रहे हैं जो सामान्य पूजन में भी आवश्यक है आप इन पूजा से होने वाले शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।

1 शिवजी दुर्गा माता विष्णु जी गणेश जी और सूर्यदेव पंचदेव कहलाते हैं उनकी पूजा हर कार्य में अनिवार्य रुप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजा करते समय इन पांच देवों का ध्यान करना चाहिए ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है तथा समृद्धि बनी रहती है।

2 प्लास्टिक की बोतल में या किसी अन्य धातु के अपवित्र बर्तन में गंगाजल नहीं रखना चाहिए लोहे अथवा एलुमिनियम के बर्तन अपवित्र धातु की श्रेणियों में आते हैं। गंगा जल को रखने के लिए तांबे का बर्तन उत्तम तथा पवित्र माना जाता है।

3 यदि घर में भगवान शिव गणेश्वर भैरव जी की मूर्ति हो आप मंदिर में इन 3 देवताओं की पूजा करते हो तो ध्यान रहे कि इन तीनों देवो पर तुलसी ना चढ़ाएं अन्यथा पूजा का उल्टा प्रभाव पड़ता है।

4 मां दुर्गा की पूजा के समय उन्हें दूर्वा ना चढ़ाएं क्योंकि यह भगवान गणेश को विशेष प्रकार से चढ़ाई जाती है।

5 तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि शास्त्रों में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना ना आए ना हाय तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजा के समय तुलसी के पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते।

6 सूर्य को शंख से अर्घ नहीं देना चाहिए।

7 शास्त्रों के अनुसार दिन में 5 बार देवी देवताओं के पूजन का विधान है सुबह 5:00 बजे से 6:00 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में पूजन और आरती होनी चाहिए इसके बाद प्रातः 9:00 बजे से 10:00 बजे तक दूसरे समय का पूजन कथा दिन के तीसरे समय पूजन होना चाहिए इस पूजन के बाद भगवान को विक्रम करवाना चाहिए इसके बाद 4:00 बजे से 5:00 बजे पुनः पूजन और आरती होनी चाहिए रात को 8:00 बजे से 9:00 बजे शयन आरती करनी चाहिए जिन घरों में नियमित रुप से 5 बार पूजन होता है वह देवी देवताओं का निवास माना जाता है तथा इसे घरों में धन्य धन्य की कोई भी कमी नहीं होती।

8 देवी देवताओं की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ करके नहीं बैठना चाहिए।

9 भगवान से कोई भी मनोकामना मांगने के बाद उसकी सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य करनी चाहिए तथा दक्षिण चलाते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए जितने शीघ्र एवं दोषों को छोडेंगे आपकी मनोकामना उतनी ही शीघ्र पूरी होगी।

10 विशेष शुभ कार्यों में भगवान गणेश को चढ़ाने वाली दूर्वा को कभी भी रविवार को नहीं तोड़ना चाहिए।

11 यदि आप ल मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हैं तो रोज कमल का पुष्प अर्पित करे कमल के फूल को 5 दिनों तक लगातार जल चढ़ाकर पुनः अर्पित कर सकते हैं।

12 शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ने वाला बिल्वपत्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता। अतः इन बिल्वपत्रों को जल चढ़ा कर उन्हें पुनः शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।


13 तुलसी के वृक्ष से टूटे हुए तुलसी के पत्तों को 11 दिन तक बासी नहीं माना जाता है अतः 11 दिन तक हम इन्हें जल्द ही छोड़कर पुनः प्रयोग में ला सकते हैं।पूजा हमेशा पूर्व की ओर या उत्तर की ओर मुख करके की जानी चाहिए ।ऐसी पूजा करने का उत्तम समय प्रात काल 6:00 बजे से 8:00 बजे तक का होता है।

14भगवान की आरती करते समय नींद निम्न बातें ध्यान रखनी चाहिए भगवान के चरणों की आरती चार बार करनी चाहिए इसके बाद क्रमशः उनके नाम भी की आरती दो बार तथा उनके मुख की आरती एक या तीन बार करनी चाहिए इस प्रकार भगवान के समस्त अंगों की 7 बार आरती होनी चाहिए।

15 घर के मंदिर के ऊपर भगवान की पुस्तकें वस्त्र एवं आभूषण में रखे मंदिर में पर्दा रखना आवश्यक है। अपने स्वर्गीय पितरों शादी की तस्वीरें मंदिर में ना रखें उन्हें घर के नेतृत्व कोण में स्थापित करना चाहिए।

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