गणेश विसर्जन: जानिये बप्पा का विसर्जन क्यों किया जाता है, क्या है इसकी पूजा विधि :

अनंत चतुर्दशी कल आ रही है । इस दिन गणेश विर्सजन किया जाता है । गणेश चतुर्थी पर्व के दौरान हर उम्र के भक्त गणपति बप्पा की सेवा में लग जाते हैं तथा उनकी पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन दस दिनों के दौरान भगवान गणेश अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आते है।

गणपति विसर्जन की पौराणिक कथा :

महर्षि वेदव्यास ने श्री गणेश को महाभारत को लेखन कार्य की जिम्मेदारी सौंपी थीं। भगवान गणेश जी को बिना रूके लेखन कार्य को जारी रखना था।

महाभारत की कथा वेद व्यास जी ने श्री गणेश को लगातार सुनाई थी। जिस कारण भगवान गणेश जी बिना रूके कथा को लिखते रहे।

महाभारत की कथा शुरू करने के बाद जब दसवें दिन महर्षि वेदव्यास जी ने अपनी आंखें खोलीं तो पाया कि गणेश के शरीर का तापमान बहुत बढ़ा हुआ है।

महर्षि वेदव्यास ने गणेश जी के शरीर का ताप कम करने के लिए तुरंत पास के एक जलकुंड से ठंडा जल लाकर भगवान गणेश जी के शरीर पर डालना आरंभ कर दिया।

जिस दिन भगवान गणेश जी के शरीर पर जल प्रवाहित किया उस दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की तिथि थी। इसी कारण से गणेश जी का विसर्जन अनंत चतुर्दशी की तिथि को किया जाता है।

ऐसे करें गणेश विसर्जन :

गणपति विसर्जन से पूर्व विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दिन बप्पा को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है जैसे मोदक और लड्डू। पूजा और आरती के पश्चात् भक्तिभाव से विसर्जन किया जाता है। विसर्जन से पहले भगवान गणेश से अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना की जाती है। आइए जाने कैसे करें भगवान श्री गणेश को बिदा-

पूजा विधि :

सबसे पहले 10 दिन तक की जाने वाली आरती- पूजा- अर्चना करें।

श्री गणेश को विशेष प्रसाद का भोग लगाएं।

अब पवित्र मंत्रों से उनका स्वस्तिवाचन करें।

एक साफ पाटा लें और गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें। घर की स्त्री उस पाटे पर स्वास्तिक बनाएं। फिर उस पर अक्षत रखें। इस पर एक पीला, गुलाबी या लाल वस्त्र बिछाएं।

इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखराए। साथ में पाटे के चारों कोनों पर एक एक सुपारी रखें।

अब भगवान श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और इस पाटे पर विराजित करें। पाटे पर विराजित करने के बाद उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक रखें।

एक छोटी सी लकड़ी लें। उस पर चावल, गेहूं तथा पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधें। यथाशक्ति दक्षिणा रखें। ऐसी मान्यता है कि मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसलिए गणेश जी के आगमन के समय घर से निकलते समय जो भी यात्रा के लिए तैयारी की जाती थी वैसी श्री गणेश के बिदा के समय की जानी चाहिए।

नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पहले कपूर की आरती पुन: संपन्न करें। भगवान श्री गणेश को खुशी-खुशी बिदा करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांगे। 10 दिन जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए भी क्षमा प्रार्थना भी करें।

भगवान श्री गणेश प्रतिमा को फेंकें नहीं उन्हें पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं।

ऐसा प्रयास करें श्री गणेश इको फ्रेंडली हों, इससे पुण्य अधिक मिलेगा क्योंकि वे पूरी तरह से पानी में गलकर विलीन हो जाएंगे।

कोरोना काल में सभी विसर्जन घरों में ही कर रहे हैं तो इसके लिए भगवान गणेश जी का इको फ्रेंडली होना ज़रूरी है।