जरूर पढ़ें; भगवान् गणेश के 8 विभिन्न अवतारों के बारे में, जो आपको कर देंगे हैरान…!!!

आपने भगवान विष्णु, बाबा भोलेनाथ, मां दुर्गा के अलग अलग अवतारों के बारे में अवश्य सुना होगा। लेकिन शायद आपको ये जानकर हैरानी होगी कि विघ्नहर्ता गणेश के भी कई अवतार हैं। जी हाँ भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। आज हम आपको भगवान गणेश के प्रमुख 8 अवतारों के बारे में बताएंगे। अन्य

भगवान गणेश वक्रतुंड अवतार
भगवान गणेश वक्रतुंड अवतार

सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, गणेश अंक आदि ग्रंथो में मिलता है। जानिए श्रीगणेश के अवतारों के बारे में-भगवान गणेश के प्रमुख 8 अवतारों के बारे में बताएंगे। तो आइये जानते है श्रीगणेश के विभिन्न अवतारों के बारे में-

वक्रतुंड

वक्रतुंड का अवतार राक्षस मत्सरासुर के दमन के लिए हुआ था। मत्सरासुर शिव भक्त था और उसने शिव की उपासना करके वरदान पा लिया था कि उसे किसी से भय नहीं रहेगा। सारे देवता शिव की शरण में पहुंच गए। शिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि गणपति वक्रतुंड अवतार लेकर आएंगे और उनके संकट दूर होंगे। गणपति ने वक्रतुंड अवतार लिया और मत्सरासुर के दोनों पुत्रों का संहार किया।

भगवान गणेश का एकदंत अवतार
भगवान गणेश का एकदंत अवतार

एकदंत

महर्षि च्यवन ने अपने तपोबल से मद की रचना की। इसके बाद उसने देवताओं का विरोध शुरू कर दिया। सभी देवताओं ने मिलकर गणपति की आराधना की। तब भगवान गणेश एकदंत रूप में प्रकट हुए। एकदंत ने देवताओं को अभय वरदान दिया और असुर मद को युद्ध में पराजित किया।

महोदर

जब कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने मोहासुर नाम के दैत्य को संस्कार देकर देवताओं के खिलाफ खड़ा कर दिया। मोहासुर से मुक्ति के लिए देवताओं ने गणेश की उपासना की। तब गणेश ने महोदर अवतार लिया।

भगवान गणेश का गजानन अवतार
भगवान गणेश का गजानन अवतार

गजानन

एक बार धनराज कुबेर भगवान शिव-पार्वती के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पर पहुंचे। वहां पार्वती को देख कुबेर के मन में काम प्रधान लोभ जागा। उसी लोभ से लोभासुर का जन्म हुआ। इसके बाद लोभासुर ने सारे लोकों पर कब्जा कर लिया और खुद शिव को भी कैलाश को त्यागना पड़ा। तब सभी देवताओं को गणेश की उपासना की। गणेश ने गजानन रूप में दर्शन दिए और लोभासुर को युद्ध के लिए संदेश भेजा। लेकिन शुक्राचार्य की सलाह पर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली।

भगवान गणेश का लंबोदर अवतार
भगवान गणेश का लंबोदर अवतार

लंबोदर

समुद्रमंथन के समय भगवान विष्णु ने जब मोहिनी रूप धरा तो शिव उन पर काम मोहित हो गए। उनका शुक्र स्खलित हुआ, जिससे एक काले रंग के दैत्य की उत्पत्ति हुई। इस दैत्य का नाम क्रोधासुर था। क्रोधासुर ने सूर्य की उपासना करके उनसे ब्रह्मांड विजय का वरदान ले लिया। क्रोधासुर के इस वरदान के कारण सारे देवता भयभीत हो गए।  वो युद्ध करने निकल पड़ा। तब गणपति ने लंबोदर रूप धरकर उसे रोक लिया।

भगवान गणेश का विकट अवतार
भगवान गणेश का विकट अवतार

विकट

भगवान विष्णु ने जलंधर के विनाश के लिए उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया जिससे एक दैत्य उत्पन्न हुआ- कामासुर। इसके बाद उसने अन्य दैत्यों की तरह ही देवताओं पर अत्याचार शुरू कर दिया। तब देवताओं के आह्वान पर भगवान गणपति ने विकट रूप में अवतार लिया जो मोर पर विराजित थे।

भगवान गणेश का विघ्नराज अवतार
भगवान गणेश का विघ्नराज अवतार

विघ्नराज

एक बार पार्वती अपनी सखियों के साथ बातचीत के दौरान जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। पार्वती ने उसका नाम मम (ममता) रख दिया। मम ने गणपति को प्रसन्न कर ब्रह्मांड का राज मांग लिया। शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। ममासुर ने भी अत्याचार शुरू कर दिए और सारे देवताओं के बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। तब देवताओं ने गणेश की उपासना की। गणेश विघ्नराज के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर का मान मर्दन कर देवताओं को छुड़वाया।

भगवान गणेश का धूम्रवर्ण अवतार
भगवान गणेश का धूम्रवर्ण अवतार

धूम्रवर्ण

अहंतासुर नामक एक असुर ने भगवान गणेश को तप से प्रसन्न कर वरदान प्राप्त कर लिया और दूसरे असुरों की ही तरह अत्याचार करने लगा। तब भगवान गणेश ने धूम्रवर्ण के रूप में अवतार लिया। उनका वर्ण धुंए जैसा था। वे विकराल थे। उनके हाथ में भीषण पाश था जिससे बहुत ज्वालाएं निकलती थीं। धूम्रवर्ण ने अहंतासुर को युद्ध में हराकर अपनी भक्ति प्रदान की।

 

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