ऐसा शिवलिंग जिसकी पूजा करने से डरते है लोग !!!

ऐसा शिवलिंग जिसकी पूजा करने से डरते है लोग !!!

एक तरफ जहां सच्चे मन से नाम लेने मात्र से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर उनकी हर मनोकामना पूर्ण कर देते हैं।भोलेनाथ की भक्ति उनके किसी भी रूप में की जा सकती है। शिवजी अनादि तथा अनंत दोनों हैं। जिस तरह निराकार रूप में ध्यान करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, लेकिन उसी प्रकार साकार रूप में शिवलिंग की पूजा से भगवान शिवशंकर को प्रसन्न किया जाता है| कई लोग अपने घर के मंदिरों में भी शिवलिंग की स्थापना करते हैं| और उस पर जल व दूध चढ़ाते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करते है।

हथिया देवाल शिवलिंग
हथिया देवाल शिवलिंग

वहीं हमारे देश में भगवान भोलेनाथ एक ऐसा मंदिर भी है जहां शिवलिंग पर भक्त न तो दूध चढ़ाते हैं और ना ही जल, यही नहीं, इस शिव मंदिर में लोग पूजा करने तक से डरते हैं।उत्तराखंड में राजधानी देहरादून से 70 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा थल जिससे लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम सभा बल्तिर. यहां भगवान शिव को समर्पित एक हथिया देवाल नाम का अभिशप्त देवालय है. यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि लोग यहां भगवान शिव के दर्शन करने तो आते हैं, लेकिन यहां भगवान पूजा नहीं की जाती.

हथिया देवाल शिवलिंग
हथिया देवाल शिवलिंग

इस मंदिर का नाम एक हथिया देवाल इसलिए पड़ा क्योंकि यह एक हाथ से बना हुआ है. यह मंदिर बहुत पुराना है और पुराने ग्रंथों, अभिलेखों में भी इसका जिक्र आता है.यहाँ एक कथा प्रचलित है की इस गांव में कई सालो पहले एक मूर्तिकार रहता था। उस शिल्पकार का एक हाथ हादसे में कट गया था। गांव वाले उसका मजाक उड़ाते थे की अब वह एक हाथ से मूर्तियां कैसे बनाएगा।लोगों के ताने सुन-सुनकर मूर्तिकार बहुत दुखी हो गया। एक दिन रात को वह मूर्तिकार अपने हाथ में छेनी और हथौड़ी लेकर गांव के दक्षिण दिशा में निकल गया। उस मूर्तिकार ने रात भर में ही एक बड़ी चट्टान को काटकर वहां पर मंदिर और शिवलिंग का निर्माण कर दिया। सुबह गाव के सभी लोग इस मंदिर को देखकर हैरान रह गए।

हथिया देवाल मंदिर
हथिया देवाल मंदिर

पण्डितों ने जब उस मंदिर का निरीक्षण किया तो पाया कि शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में है। इस शिवलिंग के विपरीत दिशा में अरघा होने के कारण यह माना गया है जिसकी पूजा फलदायक नहीं होगी बल्कि दोषपूर्ण मूर्ति का पूजन अनिष्टकारक भी हो सकता है।बस इसी के चलते रातों रात स्थापित हुए उस मंदिर में विराजमान की पूजा नहीं की जाती।इस डर के चलते तब से अब तक किसी ने इस शिवलिंग की पूजा नहीं की और आज भी इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती।

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