जानिए भगवान शिव की इस पिंडी पर चढ़ने वाले जल रहस्य के बारे मे !!

डबरा से 27 तथा भितरवार से करीब 12 किलोमीटर दूर सिंध और पार्वती नदी के संगम स्थल पर बसे ऐतिहासिक ग्राम पंवाया में प्राचीन शिव मंदिर है जिसे लोग धूमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जानते है। इतिहासकारों के अनुसार सिंध नदी का पानी काफी ऊपर से झरने के रूप में नीचे गिरता है, वहीं पानी के नीचे गिरने से धुआं सा उठता है इसलिए इस मंदिर को धूमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर में महा शिवरात्रि पर्व के दौरान यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के दर्शन करने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इतिहासकारों के मुताबिक मंदिर में स्थित भगवान शिव की पिंडी पर रोजाना ही प्रातः समय में जल चढ़ा मिलता है, जिसके बारे में अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि आखिर पिंडी पर जल कौन चढ़ाता है। वहीं यह स्थान साहित्य के गौरव महाकवि भवभूति की कर्मस्थली रही है तथा यहां पर आज भी भवभूति के समय का नाट्य रंगमंच बना हुआ है।

मंदिर का यह इतिहास है कि मंदिर पहले नाग वंशीय शासकों द्वारा बनवाया गया था। वहीं नरबलि के लिए यह प्रसिद्ध काल प्रिय मंदिर हुआ करता था, जिसे मुगल शासकों ने नष्ट कर दिया ।बाद में मुगल शासकों को इस बात की जानकारी नहीं लग सके इसके लिए ओरछा नरेश वीरसिंह जूदेव ने (ई. सन् १६०५-१६२७) में रातों रात मंदिर का निर्माण करा लिया था। उसके बाद में ई सन् (१९३६-३७) में ग्वालियर नरेश महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के राजकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया |

सूरज की पहली किरण पड़ती है पिंडी पर :

इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि मंदिर में भगवान शिव की जो पिंडी है वह नदी से निकली हुई है, जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं माप पाया है। वहीं मंदिर के आगे का जो भाग हौ मुगलकालीन शैली में नजर आता है। साथ ही मंदिर के जिस हिस्से में शिव भगवान की पिंडी निकली है उसके ठीक पीछे की दिशा से सूर्यउदय होता है तथा सूर्य की पहली किरण भी पिंडी पर पड़ती है।

कालप्रिय नाथ का मंदिर बन रहा है :

ग्रामीणों का ऐसा कहना है कि काफी समय पहले कुछ लोगोंं को यहां खेतों में भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति मिली थी। जिसको लेकर इतिहासकारों का मानना है कि यह मूर्ति मुगल शासकों द्वारा नष्ट किए गए मंदिर भगवान काल प्रिय नाथ की मूर्ति है, इस मूर्ति की स्थापना के लिए धूमेश्वर मंदिर के पीछे ही एक नए मंदिर का निर्माण करवाया जा रहा है।

महाशिवरात्री पर दर्शन के लिए आते है लाखों भक्त :

डबरा से करीब 27 किमी दूर स्थित धूमेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्री पर करीब दो लाख श्रद्धालु धूमेश्वर दर्शन जाते है। इस दौरान प्रशासन की टीम भी सख्त रहती है।महाशिवरात्री, सावन के सभी सोमवार को साथ ही प्रत्येक सोमवार को 500 के करीब भक्त महादेव के दर्शन करने आते है।