जरूर पढ़िए इस नवरात्री उस शक्तिपीठ के बारे में जहाँ गिरा था माँ सती का दाँत…!!!!

हम आपको बता रहे है छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित दंतेश्वरी मंदिर के बारे में जिसके बारे में मान्यता है कि यहां पर देवी सती के दांत गिरे थे।लोककथा के अनुसार, इस स्थल पर मां सती के दांत गिरे थे।क्योंकि यह वही समय था जब सतयुग में सभी शक्ति पीठों का निर्माण हुआ था, अत: इस स्थान की देवी को दंतेश्वरी कहा गया। इसी वजह से यह प्रमुख शक्ति पीठ है।यहां देवी के दांत गिरने के कारण इसका नाम दंतेवाड़ा और देवी का नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा।दंतेश्वरी मंदिर में देवी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।मंदिर में देवी की काले पत्थर से बनी मूर्ति स्थापित है।मंदिर का निर्माण भव्य तरीके से किया गया है।इसके अलावा, मंदिर में भगवान नरसिंह एवं नटराज की मूर्ति भी स्थापित है।इस मंदिर में कुछ और प्रतिमाएं भी हैं।मंदिर के पास ही पवित्र शंखिनी और डंकिनी नामक नदियां बहती हैं।यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

दंतेश्वरी मंदिर में गर्भगृह से पहले महामंडप में अन्य प्रतिमाओं के साथ एक गजलक्ष्मी माता और दुर्गा माता की प्रतिमा है। यह प्रतिमा दो अलग-अलग या एक अगल-बगल में नहीं। बल्कि एक ही सिक्के दो पहलू की तरह आगे-पीछे उकेरी गई है। जिसकी दीवाली पूजा अन्य दिनों के साथ दीवाली में विशेष रूप से होती है। देवी को चढ़ाया जाता है जड़ी-बूटियां से तैयार काढ़ा।देवी दंतेश्वरी मंदिर में लक्ष्मी पूजा की पूर्व संध्या पर मंदिर में सेवा देने वाले काढ़ा तैयार करने जंगल से तेजराज, कदंब की छाल, छिंद का कंद और अन्य दर्जनों जड़ी बूटियां जाती हैं, जिसे पारंपरिक रायगिड़ी वाद्य की गूंज के साथ मंदिर तक पहुंचाया जाता है। सर्वऔषधि से काढ़ा तैयार किया जाता है, जिससे लक्ष्मी पूजन की सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में देवी को स्नान करवाया जाता है,और वही प्रसाद के रूप में भक्तो को दिया जाता है।

॥जय माँ दंतेश्वरी ॥