एक ज्‍योतिर्लिंग जहां विराजते हैं ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश !!!

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में एक साथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश !!!

 

ब्रह्मा, विष्णु और महेश
ब्रह्मा, विष्णु और महेश

पवित्र नदी गोदावरी के उद्गम स्‍थल ब्रह्मगिरी नामक पर्वत पर विराजमान हैं द्वादश ज्‍योतिर्लिंगों में से आठवें भगवान त्र्यम्‍बकेश्‍वर महादेव।मान्‍यताओं के अनुसार गौतम ऋषि और माता गोदावरी की प्रार्थना के बाद ही भगवान भोलेनाथ इस पवित्र स्‍थान पर वास कर रहे हैं।त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर महाराष्ट्र-प्रांत के नासिक जिले में हैं यहां के निकटवर्ती ब्रह्म गिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम है। इन्हीं पुण्यतोया गोदावरी के उद्गम-स्थान के समीप असस्थित त्रयम्बकेश्वर-भगवान की भी बड़ी महिमा हैं गौतम ऋषि तथा गोदावरी के प्रार्थनानुसार भगवान शिव इस स्थान में वास करने की कृपा की और त्र्यम्बकेश्वर नाम से विख्यात हुए।

मंदिर के अंदर एक छोटे से गङ्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। शिवपुराण के ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिये चौड़ी-चौड़ी सात सौ सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद ‘रामकुण्ड’ और ‘लष्मणकुण्ड’ मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुँचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते हैं।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर
त्र्यंबकेश्वर मंदिर

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग में ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों ही विराजित हैं यही इस ज्‍योतिर्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता है। अन्‍य सभी ज्‍योतिर्लिंगों में केवल भगवान शिव ही विराजित हैं।कहते हैं यहां गाय को हरा चारा खिलाने का बेहद चलन है।नासिक से त्र्यंबकेश्वर मंदिर तक का सफर 35 किलोमीटर का है. इस मंदिर में प्रवेश से पहले यात्री कुशावर्त कुंड में नहाते हैं। यहां हर सोमवार के दिन भगवान त्र्यंबकेश्वर की पालकी निकाली जाती है। मंदिर की नक्‍काशी बेहद सुंदर है।ये पालकी की कुशावर्त ले जाई जाती है और फिर वहां से वापस लाई जाती है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर प्रवेश द्वार
त्र्यंबकेश्वर मंदिर प्रवेश द्वार

इसी क्षेत्र में अहिल्या नाम की एक नदी गोदावरी में मिलती है।कहा जाता है‍ कि दंपत्ति इस संगम स्थल पर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मंदिर के आसपास की खुबसूरती देखती है बनती है।श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर में अभिषेक और महाभिषेक के लिए पंडितों की व्यवस्था होती है।

 

 

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