उज्जैन के बाबा महाकाल की भस्म आरती का रहस्य :

देश मे एक ही ऐसा मंदिर है जहाँ भस्म आरती होती है । उज्जैन के बाबा महांकाल की लीला अपरम्पार है । दूर – दूर से लोग यहाँ भस्म आरती करने आते है । भस्म आरती ब्रह्म मुहर्त में होती है । इस आरती का समय सुबह 4 बजे का रहता है । बाबा महाकाल की 5 आरती में से इस आरती को प्रमुख माना जाता है । इस आरती में बाबा महाकाल के तीनों स्वरूपों में दर्शन होते है । आरती के बाद भगवान शिव सामान्य रूप धारण कर भक्तो को दर्शन लाभ देते है । आईये , जानते है भस्म आरती के रहस्य :-

  1. इस तरह शुरू हुई भस्म आरती की परंपरा :
    प्राचीन काल मे दूषण नाम के राक्षस ने उज्जैन नगरी में हाहाकार मचा दिया था । भगवान शिव ने इस राक्षस का वध कर नगरवासियो को मुक्ति दिलाई थी। इसके पश्चात भक्तों ने भगवान शिव से उज्जैन नगरी में बस जाने का आग्रह किया । भक्तों के आग्रह को स्वीकार कर महाकाल उज्जैन नगरी में बस गये ।
  2. महिलाओं के लिए कुछ अलग है नियम :-
    भस्म आरती में शामिल होने के लिए महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है । भस्म आरती के समय महिलाओं को घूंघट डालना पड़ता है। भस्म आरती के समय भगवान शिव निराकार स्वरूप धारण कर लेते हैं जिसके दर्शन की अनुमति महिलाओं को नहीं है ।
  3. राक्षस दूषण के राख से किया था श्रृंगार:-
    दूषण के वध के बाद भगवान शिव ने उसके राख से श्रृंगार किया था जिसके बाद मंदिर को महाकालेश्वर के नाम से जाना जाता है और फिर वहां भस्म आरती की परंपरा शुरू हो गई ।
  4. भस्म आरती के कुछ नियम :-
    श्मशान में सुबह जलने वाली पहली चिता से किया जाता है श्रृंगार । इस भस्म से भक्त रजिस्ट्रेशन कराते हैं तथा उनकी मृत्यु के बाद उस भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है।
  5. महिलाओं के साथ पुरुषों के लिए भी है कुछ नियम :
    भस्म आरती करने के लिए पुरुषों को शुद्ध धोती धारण करनी पड़ती है ध्यान रहे धोती सूती कपड़े की हो। पुरुषों को आरती करने की अनुमति नहीं है वहां आरती सिर्फ पुजारी ही कर सकते हैं ।

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