इस मंदिर मे देवी माँ की प्रतिमा को पसीना आये तो समझो मन्नत पूरी होगी!!!

इस मंदिर मे देवी माँ की प्रतिमा को पसीना आये तो समझो मन्नत पूरी होगी!!

यूं तो देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में ऐसे मंदिरों, देवालयों और तीर्थस्थलों की कमी नहीं है, जिनकी मान्यताएं और रीति-रिवाज अनोखी हैं। लेकिन चम्बा जिले में स्थित प्रसिद्ध देवीपीठ भलेई माता के मंदिर की बात जरा हटके है।भलेई माता के मंदिर में वैसे तो हर दिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन नवरात्रों में यहां विशेष धूम रहती है। यह मंदिर अपनी एकअजीब मान्यता को लेकर अधिक जाना जाता है, जिस पर यहां आने वाले श्रद्धालु विशेष यकीन रखते हैं।

भलेई माता
भलेई माता

चंबा जिले के उपमंडल सलूणी से लगभग 40 कि.मी. दूर भलेई नामक गांव में प्रसिद्ध शक्तिपीठ भलेई माता का मंदिर स्थित है। यह चंबा के ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि सच्चे दिल से मां के दरबार में आकर मांगने से सभी मुरादें पूरी हो जाती है।

लोग माता भलेई को जागती ज्योत के नाम से भी पुकारते हैं। मंदिर के गृभ गृह में मां भलेई की जो प्रतिमा स्थापित की गई है वह सैकड़ों वर्ष पूर्व भलेई के समीप भ्राण नामक स्थान पर एक बावड़ी में प्रकट हुई थी। भलेई माता के मंदिर में हजारों भक्त माता के दर्शनों हेतु आते हैं परंतु नवरात्रों के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। कहा जाता है कि चंबा रियासत के तत्कालीन राजा प्रताप सिंह को माता भलेई ने सपने में दर्शन देकर उन्हें चंबा ले जाने का आदेश दिया था।

भलेई माता
भलेई माता

राजा ने भ्राण पहुंचकर विद्वानों के कहे अनुसार पूर्ण विधि-विधान से माता भद्रकाली भलेई की प्रतिमा को सुंदर पालकी में विराजमान करवाकर चंबा की ओर प्रस्थान किया परंतु भलेई पहुंचने पर माता को यह स्थान भा गया और माता ने राजा को पुन: स्वप्न में दर्शन देकर इसी स्थान पर मंदिर बनवाने का आदेश दिया। राजा ने माता के आदेशानुसार यहां मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में पहले महिलाअों का आना वर्जित था लेकिन माता ने अपनी भक्त को सपने में दर्शन देकर महिलाअों को मंदिर में आने का आदेश दिया।

माना जाता है कि मां जब प्रसन्न होती हैं तोे उनकी प्रतिमा से पसीना बहने लगता है। उस वक्त जितने भी श्रद्धालु मौजूद होते हैंं, सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। कहा जाता है कि माता इसी गांव में प्रकट हुई थी उसके बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। तब से लेकर आज तक इस शक्तिपीठ में जो भी श्रद्धालु आते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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