गणपतिजी से सीख सकते हैं आप निवेश के ये 8 सबक :

देशभर में इन दिनों गणेश उत्सव की धूम धाम है । लोगों ने घरों में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित की है । श्री गणेश सुख, संपन्नता और ज्ञान के प्रतीक होते हैं । परंतु उनसे निवेश के भी कर्इ सबक लिए जा सकते हैं । आइए, देखते हैं कैसे?

क्या कहता है शीश?

भगवान गणेश का विशाल सिर कहता है निवेश के मैदान में सफलता हासिल करने के लिए हमें बड़ा सोचना चाहिए । आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के अनुसार पैसा बनाने के लिए बड़ी तस्वीर को देखना और समझना मददगार साबित होता है ।

क्या कहते हैं नेत्र ?
भगवान गणेश की आंखें बड़ी और तेज हैं । यह प्रतीक हैं कि ध्यान बंटाने वाली तरह-तरह की स्थितियां मिलेंगी । लेकिन हमें अपने लक्ष्य से नहीं भटकना चाहिए । निवेश में सफलता पाने का ये बड़ा मंत्र है ।

क्या कहते हैं भगवान गणेश के कान?
गणेश भगवान के विशाल कानों से कुछ भी अनसुना नहीं गुजरता है । यब प्रतीक हैं कि प्रभु हर बात सुनते हैं । इनसे सबक लिया जा सकता है कि हमें हर मिलने वाली जानकारी के प्रति खुला नजरिया रखना चाहिए ।इनसे मस्तिष्क में नए विचार आते है । इसलिए सलाहकारों से बात करते हुए हमे अपने कान खुले रखने चाहिए ।

क्या कहती है सूंड?
क्या आपने भगवान गणेश की सूंड को गौर से देखा है? नहीं देखा है तो ध्यान से देखना । यह बताती है कि अच्छे निवेश को हमेशा बचाना चाहिए । खराब को दुरुस्त कर देना चाहिए । बशर्ते की इसकी जरूरत पड़े ।

क्या बताता है फरसा?
भगवान गणेश के हाथ में दिखने वाले फरसे का खास महत्व है ।वह इसी फरसे से अपने भक्तों के कष्टों और विघ्नों को दूर करते हैं । निवेश के परिप्रेक्ष्य में इसका क्या मतलब होता है? ये कहता है कि बाजार में आने वाली उठापटक से चिंतित न होकर इन्हें दूर भगाना चाहिए । बाजार की बड़ी तस्वीरों पर ध्यान देना चाहिए ।

गणेशजी का पेट क्या सिखाता है?
गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है इसका भी अपना महत्व है । यह कहता है कि निवेश को बनाए रखते हुए बाजार में आने वाली हर उथल-पुथल को शांति से पचा लेना चाहिए ।

क्या बताता है लड्डू?
विघ्नहर्ता गणेश को लड्डू प्रिय हैं । उनकी पूजा में यह आकर्षण का केंद्र होते हैं । निवेश के परिप्रेक्ष्य में यह कुछ और नहीं बल्कि म्यूचुअल फण्ड के फायदे का प्रतीक हैं ।

चूहे की सवारी का क्या मतलब क्या है ?
चूहा गणेश जी की सवारी है । इसके छोटे से आकार पर नहीं जाना चाहिए । अगर अपने ऊपर आ जाए तो यह बड़ी तबाही ला सकता है । बस छूट मिलने की जरूरत होती है इसको ।इस तरह ही अपनी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को भी लगाम में लगाकर रखना चाहिए । यह नुकसान का भी सबक बन सकती हैं