जानिये भगवान शिव के 4 रहस्यमय विचार :

15 से 20 हज़ार वर्ष पूर्व वराह काल की शुरुवात में जब देवी देवताओ ने पृथ्वी पर पर अपने चरण रखे थे , तब धरती हिमयुग की चपेट में थी। उस काल में भगवान् शिव ने धरती के केंद्र कैलाश को अपना निवास बना लिया था साथ ही भगवान् विष्णु ने समुद्र को और ब्रह्मा ने नदी किनारे को अपना निवास बना लिया था।

तिब्बत , वैज्ञानिको के अनुसार इस धरती की प्राचीन भूमि है तथा पुरातन काल में इसके चारो तरफ समुद्र हुआ करता था। फिर जब समुद्र हटा तो धरती का प्रकटन हुआ तथा इस जीवन फैलता गया।
दुनिया के सभी धर्मो के मूल शिव भगवान है। भगवान शिव के दर्शन। भगवान शिव के दर्शन और जीवन की कहानी दुनिया के हर धर्म के ग्रंथो में विद्यमान है । आईये जानते है भगवान शिव के रहस्यमय विचार :
●महत्वपूर्ण है कल्पना ज्ञान से भी :
भगवान शिव ने आइंस्टाइन से पूर्व हि कह दिया था की कल्पना ज्ञान से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। हम जैसी कल्पना करेंगे वैसे ही हो जाएंगे । सपना भी एक कल्पना का रूप है । इसी आधार पर शिव भगवान ने 112 विधियों का विकास किया था।
●ध्यान करना ज़रूरी है बदलाव के लिए :
मनुष्य बदलावट की प्रमाणिकता विधि के बिना नहीं बदल सकता है। सिर्फ उपदेश देने से कुछ नहीं होता है। आदमी अगर अपने जीवन में कुछ बदलाव लाना चाहता है तो उसे ध्यान करना ज़रूरी है।
●पशुवत है आदमी :
इंसान में जब तक राग , द्वेष , ईर्ष्या , वैमनस्य , अपमान और हिंसा जैसे भाव, विचार विद्यमान रहते है तब तक वह पशुओ का ही हिस्सा रहता है। इन विचार , भावो की मुक्ति के लिए भक्ति तथा ध्यान करना ज़रूरी है।
●प्रकृति का सम्मान करो :
प्रकृति ने हमे जीवन दान दिया है। इसका सम्मान करना हमारा फ़र्ज़ है। जो इसका अपमान करता है समझलो उसने मेरा अपमान किया है।प्रकृतिं के कुछ नियम है और दुनिया का हर काम प्रकृति के नियमो के अनुसार ही होता है|