पढ़िए हनुमान जी का असाधारण बजरंग बाण ;जिसे नहीं कर सकते छोटी-मोटी समस्याओं में प्रयोग..!!!

हनुमान जी हमेशा अपने भक्तों पर कृपा करते है भक्तों के बुलाने पर वे उनकी समस्याएँ दूर कर देते है। हनुमानजी के बजरंग बाण के बारे में कहा जाता है कि इसका प्रयोग हर कहीं, हर किसी को नहीं करना चाहिए। जब व्यक्ति घोर संकट में हो तब ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए वरना राम भक्त हनुमान इसके प्रयोग में हुई त्रुटि को क्षमा नहीं करते हैं। छोटी-मोटी समस्याओं में इस का प्रयोग निषेध है। इसका प्रयोग किसी अत्यंत अभिष्ट कार्य के

राम भक्त हनुमान
राम भक्त हनुमान

लिए भी किया जाता है मगर इसमें सावधानी रखने की जरूरत होती है।आइये जानते है बजरंग पाठ के नियम:

  • इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन तय करें। हनुमानजी की प्रतिमा या आकर्षक चित्र रख लें।
  • पूजा के लिए कुशासन (एक विशेष प्रकार की घास से बना आसन) प्रयोग करें।

  • पूजा के लिए स्थान का शुद्ध एवं शान्त होना जरूरी है। किसी एकान्त अथवा निर्जन स्थल में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें।
  • हनुमान जी की पूजा में दीपदान का खास महत्त्व होता है। पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को पूजा से पहले एक-एक मुट्ठी मात्रा में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर इस आटे से दीया बनाएँ।
भक्ति में लीन हनुमान
भक्ति में लीन हनुमान
  • बत्ती के लिए एक कच्चे सूत को अपनी लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। जब तक पूजा चलें, यह दिया जलता रहना चाहिए। गूगल व धूप की विशेष व्यवस्था रखें।
  • ॐ हनुमंते नम: का जप निरंतर करें।

  • जप के प्रारम्भ में यह संकल्प लें कि आपका कार्य जब भी सिद्ध होगा, हनुमानजी की सेवा में नियमित कुछ अवश्य करेंगे। अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग पाठ का जाप प्रारम्भ करें। ‘श्रीराम’ से लेकर ‘सिद्ध करैं हनुमान’ तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है।
  • बता दें जिस घर में बजरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट नहीं आते। जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए।

॥ जय श्री राम ॥

॥ जय हनुमान ॥

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