क्यों जलाई जाती है नवरात्र में अखंड ज्योत; कैसे अखंड ज्योति से भी हो सकता है नुकसान..!!!

शक्ति की उपासना का 9 दिन का पर्व नवरात्र आरम्भ हो चूका है इस दौरान माँ आदिशक्ति के हर रूप की  क्रमश: अलग-अलग पूजा की जाती है। मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कई घरों में नवरात्र के नौ दिन माता के सामने अखंड ज्योत जलाई जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह अखंड ज्योत क्यों जलाई जाती है, और इसको जलाने के कुछ नियम भी हैं, जिन के खण्डित होने पर लाभ की बजाय नुकसान सकता है। आइये जानते है इस बारे में:

नवरात्री में घर में अखंड ज्योत जलते हुए
नवरात्री में घर में अखंड ज्योत जलते हुए

अखंड ज्योत इसलिए जलाई जाती है कि जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी छोटा का दीपक अपनी लौ से अंधेरे को दूर भगाता रहता है उसी प्रकार हम भी माता की आस्था का सहारा लेकर अपने जीवन के अंधकार को दूर कर सकते हैं। मान्यता के अनुसार दीपक या अग्नि के समक्ष किए गए जप का साधक को हजार गुना फल प्राप्त हो है।

अखंड ज्योत जलाने के नियम

  • शास्त्रों के अनुसार अखंड दीपक की लौ संकल्प की अवधि में खंडित नहीं होनी चाहिए, अर्थात जब तब ज्योति जलाने का संकल्प लिया है तब तक निरंतर ज्योति जलनी चाहिए।
  • कहा जाता है कि घी युक्त ज्योति देवी के दाहिनी ओर तथा तेल युक्त ज्योति देवी के बाईं ओर रखनी चाहिए।
  • हवा के झोंके दीपक की लौ को बुझा न सके इसलिए दीपक को कांच के गोले में रख सकते हैं।
अखंड ज्योत जलते हुए
अखंड ज्योत जलते हुए
  • तेल अथवा घी की कमी के कारण ज्योति न बुझे इसलिए एक व्यक्ति दीपक का पूरा ध्यान रखें।
  • कई बार बाती में कालिख जम जाने की वजह से लौ बुझने लगती है। ऐसे समय में एक बाती जलाकर दीये में रख दें। मुख्य बाती को ऊपर उठाकर जमी हुई कालिख हटा दें।

  • संकल्प अवधि पूरी होने के बाद भी दीपक में जब तक तेल मौजूद हो जलते रहने देना चाहिए।
  • फूंक मारकर अथवा अन्य किसी तरीके से दीपक को नहीं बुझाना चाहिए।
  • अगर इन नियमों का पालन करने में कठिनाई हो तब संकल्प के बिना दीपक जलाना चाहिए। क्योंकि संकल्प किया हुआ अंखड दीपक समय से पूर्व बुझ जाने पर जिस इच्छा की पूर्ति के लिए दीपक जलाया जाता है उसके पूर्ण होने में संदेह रहता है। परिवार में कई तरह की परेशानियां आती हैं। घर के सदस्यों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 

॥ जय माता दी ॥

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