29 अप्रैल से पहले जान ले अक्षय तृतीया के बारे मे यह 4 बातें जो हर इंसान को पता होना चाहियें !!!

अक्षय तृतीया के बारे मे यह 4 बातें जो हर इंसान को पता होना चाहियें !!!

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे आखा तीज भी कहते हैं। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह साल में आने वाले 4 अबूझ मुहूर्तों में से एक है (अक्षय तृतीया के अलावा देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी व भड़ली नवमी को भी अबूझ मुहूर्त माना जाता है)। इस बार ये पर्व 29 अप्रैल शनिवार को है। आज हम आपको अक्षय तृतीया से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार है-

अक्षय तृतीया क्यों है विशेष?

हिंदू पंचांग के मुताबिक वर्ष के दूसरे महीने वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। इस तिथि पर किए गए दान-धर्म का अक्षय यानी कभी नाश न होने वाला फल व पुण्य मिलता है। इसलिए यह सनातन धर्म में दान-धर्म का अचूक काल माना गया है। इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि यह तिथि 8 चिरंजीवियों में एक भगवान परशुराम की जन्म तिथि भी है। हिंदू धर्म मान्यताओं में किसी भी शुभ काम के लिए साल के स्वयं सिद्ध मुहूर्तों में आखा तीज भी एक है।

 जानिये अक्षय तृतीया के बारे मे यह 4 बातें जो हर इंसान को पता होना चाहियें

1.शास्त्रों के मुताबिक वैशाख माह विष्णु भक्ति का शुभ काल है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस माह की अक्षय तृतीया को ही भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव और परशुराम अवतार हुए थे। इसलिए इस दिन परशुराम जयंती, नर-नारायण जयंती भी मनाई जाती है। त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा भी पुण्यदायी व महामंगलकारी मानी जाती है।

2.इस शुभ तिथि पर किए गए दान व उसके फल का नाश नहीं होता। इस दिन खासतौर पर जौ, गेहूं, चने, सत्तू, दही-चावल, गन्ने का रस, दूध के बनी चीजें जैसे मावा, मिठाई आदि, सोना और जल से भरा कलश, अनाज, सभी तरह के रस और गर्मी के मौसम में उपयोगी सारी चीजों के दान का महत्व है। पितरों का श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन कराने का भी अनन्त फल मिलता है।

3.हिंदू धर्मग्रंथों में अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस तिथि पर सूर्य और चंद्र अपनी उच्च राशि में होते हैं। इसलिए इस दिन शादी, कारोबार की शुरूआत और गृह प्रवेश करने जैसे मांगलिक काम बहुत शुभ साबित होते हैं। शादी के लिए जिन लोगों के ग्रह-नक्षत्रों का मिलान नहीं होता या मुहूर्त नहीं निकल पाता, उनको इस शुभ तिथि पर दोष नहीं लगता व निर्विघ्न विवाह कर सकते हैं।

4. हिंदु वेदो मे यह माना गया अक्षय तृतीया के दिन भारत की पवित्र नदी गंगा पृथ्वी पर उतरी थी तभी आप देखसकते है कि इस दिन सभी लोग इस पावन नदी मे डुबकी लगाकर उनके द्वारा हुए पाप के लिये क्षमा याचना करते है।

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