सूर्य देव का अद्भुत कवच; सूर्यकवच, जो दिलाता है बुरी शक्तियों के प्रभावों से छुटकारा..!!!

धार्मिक कथा ( Religious Story)    

हमारे हिन्दू शास्त्र में प्रत्येक भगवान (Bhagwaan) से जुड़ी कथाएं है।

हम सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग भगवान (Bhagwaan) की पूजा करते है और प्रत्येक भगवान की पूजा के अनुकूल फल प्राप्त करते है।

रविवार (Sunday) का दिन सूर्यदेव (Surya Dev) की पूजा का दिन है।

सूर्य देव
सूर्य देव

सूर्यदेव (Surya Dev) जगत के साक्षात् देवता के रूप में गए है, इनकी पूजा से हमारे कई कष्ट दूर हो जाते है।

आज हम आपको ‘सूर्यकवच’  के पाठ के बारे में बताएंगे।

श्री सूर्य कवच याज्ञवल्क्य जी जी द्वारा रचित एक बहुत ही सुन्दर कृति है ये एक कवच है जो के मनुष्य को आपदाओं, संकट, धन का अभाव, और बुरी शक्तियों के साथ-साथ दुश्मनो से भी बचाता है ये कवच भगवान (Bhagwaan) सूर्य का कवच है।

सूर्यकवच

यदि इस कवच को पूर्ण श्रद्धा और सच्चे भक्ति भाव से अपने घर पर लगाया जाता है तो भगवान (Bhagwaan) सूर्य देव (Surya Dev) की कृपा होती है और वो आपको और आपके परिवार को किसी भी तरह के शत्रु से, परेशानी से बचाते हैं बल्कि आपको पूरे परिवार सहित स्वस्थ, सुखी और धनवान भी बनते हैं।

सूर्य देव
सूर्य देव

आइये जानते है श्री सूर्य कवच (Surya Kavach) के बारे में;

‘सूर्यकवचम’

याज्ञवल्क्य उवाच-

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।1।

याज्ञवल्क्यजी बोले- हे मुनि श्रेष्ठ! सूर्य के शुभ कवच को सुनो, जो शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।2।

चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकराकृत कुंडल वाले हजार किरण (सूर्य) को ध्यान करके यह स्तोत्र प्रारंभ करें।

सूर्यकवच
सूर्यकवच

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।3।

मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र (आंखों) की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें।

धार्मिक कहानियाँ (Religious Stories)

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।4।

मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित, जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें।

सूर्य (Surya) रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।5।

सूर्य देव
सूर्य देव

सूर्य (Surya) रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।6।

स्नान (Bath) करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह रोग से मुक्त हो जाता है, दीर्घायु होता है, सुख तथा यश प्राप्त होता है।

 

 

॥ जय सूर्य देव ॥