आखिर कौन है ये आसमान में दिखने वाले सप्तऋषि;आप भी जाने…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

-हमारे हिन्दू धर्म में ४ वेद(Ved) है और इन चारों वेदों में हजारों मंत्र हैं

-बतादें इन सभी मंत्रों की रचना ऋषियों(Rishi) ने की है।

-मंत्रों(mantra) की रचना में कई ऋषियों(Rishi) का योगदान रहा है।

-जब भी हम पृथ्वी से आकाश की ओर देखते है तो हमें आसमान में सात तारों का एक मंडल नजर आता है इन्हे ही सप्तऋषि का मंडल कहा जाता है।

आसमान में दिखने वाले सप्तऋषि
आसमान में दिखने वाले सप्तऋषि

-यह जानकर आपको हैरानी होगी की उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के आधार पर ही रखे गए हैं।

-आइये जानते है किन संतों के नाम पर रखा है सप्तऋषि मंडल का नाम ।

सप्तऋषि

ऋषि वशिष्ठ

-ऋषि वशिष्ठ(Vashishth) राजा दशरथ के कुलगुरु और चारों पुत्र श्रीराम(Ram), लक्ष्मण(Lakshman), भरत(Bharat) और शत्रुध्न(Shatrughn) के गुरु थे।

-कामधेनु(Kamdhenu) गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था।

सप्तऋषि: ऋषि वशिष्ठ
सप्तऋषि: ऋषि वशिष्ठ

ऋषि विश्वामित्र

ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र(Vishwamitra) एक राजा थे

-वे ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु(Kamdhenu) गाय हड़पना चाहते थे।

-इसके लिए उन्होंने युद्ध भी किया था, लेकिन वे वशिष्ठ ऋषि से हार गए थे।

-इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया था। विश्वामित्र ने एक नए स्वर्ग की रचना भी कर दी थी।

-ऋषि विश्वामित्र ने ही गायत्री मन्त्र(Gayatri mantra) की रचना की है जो आज भी सबसे चमत्कारिक मन्त्र है।

सप्तऋषि ऋषि विश्वामित्र
सप्तऋषि ऋषि विश्वामित्र

-वैदिक काल के ऋषि हैं ऋषि कण्व(Kanva)।

-इन्होने अपने आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण किया था।

-ऋषि कण्व ने लौकिक ज्ञान-विज्ञानं और अनिष्ट-निवारण संबंधी असंख्य मन्त्र रचे हैं।

सप्तऋषि: ऋषि कण्व
सप्तऋषि: ऋषि कण्व

धार्मिक कथा ( Religious Story)

ऋषि भारद्वाज

-वैदिक ऋषियों में ऋषि भारद्वाज(Bhardwaj) का स्थान भी काफी ऊंचा है।

-भारद्वाज के पिता बृहस्पतिदेव(Brahaspati Dev) और माता ममता थी।

-ऋषि भारद्वाज ने वेदों में कई मंत्र रचे हैं। उन्होंने भारद्वाज-स्मृति और भारद्वाज-संहिता की भी रचना की है।

सप्तऋषि: ऋषि भारद्वाज
सप्तऋषि: ऋषि भारद्वाज

ऋषि अत्रि

-महर्षि अत्रि(Atri) ब्रह्मा(Brahma) के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहुति की पुत्री अनुसूया के पति बताए हैं।

– ये भगवान दत्तात्रेय, चन्द्रमा, दुर्वासा के माता-पिता है।

सप्तऋषि: ऋषि अत्रि
सप्तऋषि: ऋषि अत्रि

ऋषि वामदेव

-वामदेव(Vamdev) ने सामगान यानी संगीत की रचना की है।

-ये गौतम ऋषि के पुत्र थे। भरत मुनि द्वारा रचित भरत नाट्य शास्त्र सामदेव से ही प्रेरित है।

-हज़ारों वर्ष पूर्व रचे गए सामदेव में संगीत और वाद्य यंत्रों की सम्पूर्ण जानकारी मिलती है।

सप्तऋषि
सप्तऋषि

ऋषि शौनक

-प्राचीन समय में ऋषि शौनक(Shaunak) ने दस हज़ार विधार्थियों का गुरुकुल स्थापित किया और कुलपति बनने का सम्मान हासिल किया।

-किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया था। साथ ही, इन्होंने भी कई मंत्र रचे हैं।

 

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