जानें कैसे हुई विष्णु नाम की उत्पत्ति; क्या है विष्णु जी के नाम का अर्थ…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु (Vishnu) परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं।

पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु (Vishnu) को जगत का पालनहार कहा गया है।

लेकिन क्या आप जानते है त्रिमूर्ती के देवों में से एक विष्णुजी का नाम विष्णु (Vishnu) क्यों पड़ा ।

भगवान विष्णु
भगवान विष्णु

उनके इस नाम का अर्थ क्या है।

आज हम आपको बताते है इस नाम के पीछे का रहस्य ।

विष्णु नाम की उत्पत्ति

माना जाता है कि विष्णु (Vishnu) शब्द की उत्पत्ति मुख्यतः विष धातु से हुई है।

निरुक्त 12.18 में यास्काचार्य ने मुख्य रूप से विष् धातु को ही व्याप्ति के अर्थ में लेते हुए उससे विष्णु (Vishnu) शब्द को निष्पन्न बताया है।

भगवान विष्णु
भगवान विष्णु

वैकल्पिक रूप से विष् धातु को भी प्रवेश के अर्थ में लिया गया है, ‘क्योंकि वह विभु होने से सर्वत्र प्रवेश किया हुआ होता है।

आदि शंकराचार्य ने भी अपने विष्णुसहस्रनाम-भाष्य में शब्द का अर्थ मुख्यतः व्यापक ही माना है, और उसकी व्युत्पत्ति के रूप में स्पष्ट लिखा है कि व्याप्ति अर्थ के वाचक नुक् प्रत्ययान्त विष् धातु का रूप विष्णु (Vishnu) बनता है।

विष्णु का अर्थ

विष्णुपुराण (Vishnu Puran) में कहा गया है उस महात्मा की शक्ति इस सम्पूर्ण विश्व में प्रवेश किये हुए हैं; इसलिए वह विष्णु (Vishnu) कहलाता है, क्योंकि विष् धातु का अर्थ प्रवेश करना है।

ऐसा ही ऋग्वेद के प्रमुख भाष्यकारों, आचार्य सायण, श्रीपाद दामोदर सातवलेकर और महर्षि दयानन्द सरस्वती जैसे विद्वानों ने भी माना है।

भगवान् विष्णु
भगवान् विष्णु

इससे स्पष्ट है कि शब्द विष् धातु से निष्पन्न है और उसका अर्थ व्यापनयुक्त यानि सर्वव्यापक है।

धार्मिक कथा ( Religious Story)    

वैदिक समय से ही नारायण (Narayan) सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं।

न्याय को प्रश्रय, अन्याय के विनाश तथा जीव अर्थात मानव को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में हरी (Hari) मान्य रहे हैं।

विष्णु जी अपनी नागों की शय्या पर लेटे हुए
विष्णु जी अपनी नागों की शय्या पर लेटे हुए

पुराणों के अनुसार नारायण (Narayan) की पत्नी लक्ष्मी (Lakshmi)हैं,

उनका निवास क्षीर सागर है,

उनका शयन शेषनाग के ऊपर है

उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा (Brahma)जी स्थित हैं।

वे अपने नीचे वाले बायें हाथ में पद्म धारण करते हैं।

भगवान् विष्णु
भगवान् विष्णु

नीचे वाले दाहिने हाथ में कौमोदकी नाम की गदा धारण करते हैं।

ऊपर वाले बायें हाथ में पांचजन्य शंख (Shankh)धारण करते हैं।

ऊपर वाले दाहिने हाथ में सुदर्शन चक्र (Sudarshan Chakra)धारण करते हैं।

॥ नमो नारायण ॥

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