जरूर पढ़ें रामायण की एक अनसुनी कहानी; क्यों किया देवी सीता ने कुंभकर्ण के पुत्र का वध…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

रामायण (Ramayan)से जुडी कई बातें है जिनके बारे में काम लोग जानते होंगे ।

आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइये पढ़ते है:

 रामायण
रामायण

यह कहानी तब की है जब श्रीराम (Ram)अपनी पत्नी सीता (Seeta)और भाई लक्ष्मण (Lakshman)के साथ वापस अयोध्या लौट आए थे।

श्रीराम (Ram)अपने परिवार के साथ सभा में विराजमान थे ।

तभी अचानक विभीषण अपनी पत्नी और मंत्रियों के साथ दौड़े-दौड़े श्रीराम (Ram) के पास पहुंचे और उनसे मदद की गुहार करने लगे।

जब भगवान राम (Ram) ने उनसे इस परेशानी का कारण पूछा ।

तो विभीषण ने बताया कि कुंभकर्ण का एक पुत्र है मूलकासुर (Mulkasur) , जिसका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था।

इस कारण कुंभकर्ण उसे जंगल में छोड़ आया था, जहां मधुमक्खियों ने उसका पालन-पोषण किया।

श्री राम
श्री राम

रामायण की अनसुनी कथा

जब मूलकासुर (Mulkasur) को यह पता चला कि उसके पिता का वध हो गया है और मैंने लंका का शासन संभाल लिया है ।

तो उसने प्रण लिया कि वह पहले मेरी हत्या करेगा और बाद आपकी हत्या करेगा।

जब श्रीराम (Ram) को मूलकासुर (Mulkasur) के इरादों का पता चला ।

तो उन्होंने अपने पुत्रों और भाइयों समेत, वानर सेना को भी युद्ध के लिए तैयार किया और लंका (Lanka) की ओर चल पड़े।

जब मूलकासुर (Mulkasur)को श्रीराम (Ram) और उनकी सेना के आने की बात चली।

तो वो पहले ही युद्ध के इरादे से लंका के बाहर पहुंच गया।

वाल्मीकि रामायण
वाल्मीकि रामायण

दोनों ओर की सेनाओं में करीब 7 दिनों तक भयंकर युद्ध चलता रहा लेकिन कोई परिणाम नहीं आया।

फिर ब्रह्मा (Brahma) जी प्रकट हुए और उन्होंने श्रीराम (Ram) से कहा कि उन्होंने मूलकासुर (Mulkasur) को एक स्त्री के हाथों मृत्यु प्राप्त करने का वरदान दिया है।

इसलिए मूलकासुर (Mulkasur) की मृत्यु एक स्त्री द्वारा ही संभव है।

ब्रह्मा जी ने भगवान राम (Ram)को बताया कि एक बार ऋषि-मुनियों के बीच बैठे हुए मूलकासुर (Mulkasur) ने शोक व्यक्त करते हुए कहा था

“चंडी सीता की वजह से मेरे कुल का विनाश हुआ है”।

इस पर एक ऋषि ने क्रुद्ध होकर कहा “जिस सीता को तू चंडी कह रहा है, उसी के हाथ से तेरा अंत निश्चित है”।

देवी सीता का चंडी रूप
देवी सीता का चंडी रूप

देवी सीता ने किया कुंभकर्ण के पुत्र का वध

यह सुनते ही भगवान राम (Ram) ने हनुमान (Hanuman) जी को सीता (Seeta) को लाने के लिए भेज दिया।

माँ सीता (Seeta) के आते ही भगवान राम (Ram) ने उन्हें मूलकासुर (Mulkasur) के पराक्रम और उसे मिले वरदान के विषय में बताया।

यह सब सुनते ही माता सीता (Seeta) क्रोधित हो गईं ।

उन्होंने चंडी रूपी छाया निकलकर मूलकासुर (Mulkasur) का वध करने के लिए आगे बड़ा दी।

छाया को अपने पास आता देखकर मूलकासुर ने उन्हें कहा “जा, भाग जा यहां से, मैं स्त्रियों पर अपना पराक्रम नहीं दर्शाता”।

राम सीता
राम सीता

इसपर चंडी छाया ने मूलकासुर (Mulkasur) से कहा “मैं तेरी मृत्यु चंडी हूं, तूने ब्राह्मणों का वध किया है, अब मैं तेरा वध करके उनका ऋण चुकाऊंगी”।
छाया ने “चंडिकास्त्र” चलाकर मूलकासुर (Mulkasur) का सिर उड़ा दिया।

वह सीधा लंका (Lanka) के दरवाजे पर जा गिरा।

और इस तरह सीता (Seeta) माता के हाथों हुआ था कुंभकर्ण के पुत्र मूलकासुर (Mulkasur) का वध संभव हुआ।

 

॥जय सियाराम ॥

 

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