आज जानिए कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु; महाभारत की कथा…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

महाभारत (Mahabharat) के युद्ध के बाद युधिष्ठिर (Yudhishthir) राजा बन गए।

युद्ध के बाद युधिष्ठिर (Yudhishthir) विदुर को अपना मंत्री बनाना चाहते थे लेकिन विदुर ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।

कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु
कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु

गांधारी (Gandhari) पुत्रों के वियोग में और कुंती (Kunti) पौत्रों के वियोग में हमेशा दुखी रहा करती थी, युद्ध के बाद धृतराष्ट्र (Dhritrashtra) का एकमात्र पुत्र युयुत्सु जीवित था।

लेकिन भीम उसे रोज नए ताने मारता था, क्योंकि दुर्योधन (Duryodham) की हर साजिश का पता धृतराष्ट्र (Dhritrashtra) को था।

महाभारत की कथा

भीम के रोज के तानो से धृतराष्ट्र (Dhritrashtra) का मोह खत्म होता रहा था जिसके बाद उसने गांधारी (Gandhari) , कुंती (Kunti) और विदुर ने वन में तपस्या करने की ठानी और चारो वन में चले गए।

महाभारत
महाभारत

वहीं सब ने तपस्या की और वहीं रहने लगे। राजसी जीवन से वनवासी की तरह जीवन यापन करने से इनका बुढ़ा शरीर कमजोर होने लगा।

एक साल बाद जब युधिष्ठिर (Yudhishthir) उनसे मिलने गए तो धृतराष्ट्र (Dhritrashtra) कुंती (Kunti) और गांधारी (Gandhari) उससे मिलकर बड़े प्रसन्न हुए, लेकिन आश्रम में विदुर न थे वो एक पेड़ के नीचे तप्स्या कर रहे थे और जब युधिष्ठिर (Yudhishthir) उनसे मिलने पहुंचे तो उनके प्राण निकल गए और उनकी आत्मा युधिष्ठिर में समा गई।

कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु
कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु

कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु

एक दिन संयोगवश वन में आग लग गई।

सभी लोग अपनी-अपनी जान बचाकर भागने लगे।

दुर्बलता के कारण धृतराष्ट्र (Dhritrashtra), गांधारी (Gandhari) व कुंती (Kunti) भागने में असमर्थ थे।

इसलिए उन्होंने उसी अग्नि में प्राण त्यागने का विचार किया और वहीं एकाग्रचित्त होकर बैठ गए।

इस प्रकार धृतराष्ट्र (Dhritrashtra), गांधारी (Gandhari) व कुंती (Kunti) ने अपने प्राणों का त्याग कर दिया।

कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु
कैसे हुई धृतराष्ट्, गांधारी और कुन्ती की मृत्यु

संजय ने ये बात तपस्वियों को बताई और वे स्वयं हिमालय पर तपस्या करने चले गए।

धृतराष्ट्र (Dhritrashtra), गांधारी (Gandhari) व कुंती (Kunti) की मृत्यु का समाचार जब महल में फैला तो हाहाकार मच गया।

तब देवर्षि नारद ने उन्हें धैर्य बंधाया।

युधिष्ठिर (Yudhishthir) ने विधिपूर्वक सभी का श्राद्ध कर्म करवाया और दान-दक्षिणा देकर उनकी आत्मा की शांति के लिए संस्कार किए।