मंत्रोच्चार में बरते सावधानी;होंगे सभी काम सफल..!!!

धार्मिक कथा ( Religious Story)

मंत्रोच्चार

हमारे हिन्दू धर्म में मन्त्रों की अहम् भूमिका बताई गई है।  मंत्र (mantra) हमारे द्वारा की गई पूजा(Pooja) का एक विशेष कार्य होता है । हिन्दू देवी देवताओ के विभिन्न मंत्र बताये गए है। जिन्हे एकाग्रता और मन के संयम के साथ जप करना बहुत जरुरी है। ऐसा माना जाता है कि इनके बिना मंत्रों की शक्ति कम हो जाती है और कामना पूर्ति या लक्ष्य प्राप्ति में उनका प्रभाव नहीं होता है।

मंत्रोच्चार में बरते सावधानी
मंत्रोच्चार में बरते सावधानी

आज यहां हम आपको मंत्र(mantra) जप से संबंधित 10 जरूरी नियम और तरीके बताए जा रहे हैं। जो गुरु(Guru) मंत्र(mantra) हो या किसी भी देव(Dev) मंत्र (mantra)और उससे मनचाहे कार्य सिद्ध करने के लिए बहुत जरूरी माने गए हैं । अगर आप मंत्र(mantra) जाप करना चाहते है तो इन बातों का अवश्य ध्यान रखें ताकि आपके सभी काम सफल हो:

मंत्रोच्चार में  सावधानी

1.  मंत्रों का पूरा लाभ पाने के लिए जप के दौरान सही मुद्रा या आसन में बैठना भी बहुत जरूरी है।

-इसके लिए पद्मासन मंत्र जप के लिए श्रेष्ठ होता है।

-इसके बाद वीरासन और सिद्धासन या वज्रासन को प्रभावी माना जाता है।

-अगर आपको आसन लगाने में दिक्कत हो तो आप एक आरामदायक मुद्रा में भी बैठ कर लगा सकते है।

मंत्र जप प्रतिदिन नियत समय पर ही करें
मंत्र जप प्रतिदिन नियत समय पर ही करें

2. मंत्र(mantra) जप के लिए सही वक्त भी बहुत जरूरी है।

-इसके लिए ब्रह्ममूर्हुत यानी तकरीबन 4 से 5 बजे या सूर्योदय से पहले का समय श्रेष्ठ माना जाता है।

-प्रदोष काल यानी दिन का ढलना और रात्रि के आगमन का समय भी मंत्र(mantra) जप के लिए उचित माना गया है।

3. अगर यह वक्त भी साध न पाएं तो सोने से पहले का समय भी चुना जा सकता है।

4. मंत्र(mantra) जप प्रतिदिन नियत समय पर ही करें।

महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र

5. एक बार मंत्र (mantra)जप शुरु करने के बाद बार-बार स्थान न बदलें।

-एक स्थान नियत कर लें।

-बार बार स्थान बदलने से आपका ध्यान भटक सकता है ।

-आपको मंत्र (mantra)जाप का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है फिर ।

पौराणिक कथा ( Mythological Story)

6. मंत्र जप में तुलसी(Tulsi), रुद्राक्ष(Rudraksh), चंदन(Chandan) या स्फटिक की 108 दानों की माला का उपयोग करें।

-यह प्रभावकारी मानी गई है।

मंत्र जप में 108 दानों की माला का उपयोग करें
मंत्र जप में 108 दानों की माला का उपयोग करें

7. किसी विशेष जप के संकल्प लेने के बाद निरंतर उसी मंत्र का जप करना चाहिए।

-बार बार मंत्र (mantra) न बदले एक ही मंत्र (mantra) का जाप करते रहें ।

8. मंत्र (mantra)जप के लिए कच्ची जमीन, लकड़ी की चौकी, सूती या चटाई अथवा चटाई के आसन पर बैठना श्रेष्ठ है।

-सिंथेटिक आसन पर बैठकर मंत्र जप से बचें।

गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र

9.ध्यान रखें की मंत्र (mantra)जप अगर आप दिन में करें तो अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें ।

-अगर रात्रि में कर रहे हैं तो मुंह उत्तर दिशा में रखें।

-मंत्र (mantra) जाप के दौरान दिशा का ध्यान अवश्य रूप से रखें ।

10.मंत्र (mantra) जप के लिए एकांत और शांत स्थान चुनें।

-जैसे- कोई मंदिर या घर का देवालय, या ऐसी कोई जगह जो पवित्र एवं शांत हो ।

 

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

One Comment