पितृपक्ष : जानिए कौवे और पितृ तर्पण में क्या है सम्बन्ध !!

हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध का काफी महत्व है । पितृपक्ष में पित्तरों का श्राद्ध तथा तर्पण किया जाता है। इन दिनों कौवों को भी भोजन कराया जाता है।इस दिन कौवों को भोजन कराना काफी महत्वपूर्ण माना गया है । क्या है इसका कारण , तो आइये जानते हैं-

श्राद्ध में कौवों का महत्व :

पितृपक्ष में पित्तरों का श्राद्ध तथा तर्पण करना जरूरी माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा नहीं करता तो उसे पित्तरों का श्राप लग जाता है शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने के बाद जितना जरूरी भांजे और ब्राह्मण को भोजन कराना होता है, उतना ही जरूरी कौवों को भोजन कराना होता है । ऐसा माना जाता है कि कौवे इस समय में हमारे पित्तरों का रूप धारण करके पृथ्वीं पर उपस्थित रहते हैं ।

कौवा यम का प्रतीक है :

कौआ यम का प्रतीक होते है, मृत्यु का वाहन भी होते है, जो पुराणों में शुभ और अशुभ का संकेत देने वाला बताया गया है। इस कारण से पितृ पक्ष में श्राद्ध का एक भाग कौओं को भी लगाया जाता है। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा ही महत्व होता है। श्राद्ध पक्ष में कौआ यदि आपके हाथों दिया भोजन ग्रहण कर ले, तो ऐसा माना जाता है कि पितरों की कृपा आपके ऊपर है, पूर्वज आपसे भी प्रसन्न हैं। इसके विपरीत यदि कौआ भोजन करने नहीं आए, तो ऐसा माना जाता है कि पितर आपसे विमुख हैं या नाराज हैं।

भारतीय मान्यता के मुताबीक व्यक्ति मरकर सबसे पहले कौआ के रूप में जन्म लेता है और कौआ को खाना खिलाने से वह भोजन पितरों को मिलता है। इसका कारण यह है कि पुराणों में कौए को देवपुत्र माना जाता है।

एक पौराणिक कथा :

इसके पीछे पौराणिक कथा जुड़ी है । इन्द्र के पुत्र जयन्त ने सबसे पहले कौवे का रूप धारण किया था। त्रेतायुग की यह कथा है की जब भगवान श्रीराम ने अवतार लिया और जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मारा था । तब भगवान श्रीराम ने तिनके का बाण चलाकर जयंत की आंख फोड़ दी।जब उसने अपने किए की माफी मांगी, तब राम ने उसे यह वरदान दिया कि तुम्हें जो भोजन अर्पित किया वह पितरों को मिलेगा । तभी से श्राद्ध में कौवों को भोजन कराने की परंपरा चल रही है।यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष में कौवों को ही सबसे पहले भोजन कराया जाता है ।

इस समय में कौवों को न तो मारा जाता है और न हीं किसी भी रूप से उसे सताया जाता है ।यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे पित्तरों के श्राप के साथ- साथ अन्य देवी देवताओं के क्रोध का भी सामना करना पड़ता है तथा उन्हें जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार की कोई सुख और शांति प्राप्ति नहीं होती ।