अगर करना चाहते है दुर्गा सप्तशती का पाठ; तो ध्यान रखें इन नियमों का, मिलेगी हर तरफ जीत, सुख और समृद्धि..!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

-देवी माँ के नवरात्रे(Navratri) प्रारंभ हो चुके है।

-ऐसे में हम आपको बता रहें है की मां दुर्गा(Maa durga) की स्तुति में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें ।

-इससे आपको हर काम में सफलता मिलने लगेगी और आपके घर में समृद्धि का वास होगा ।

माँ दुर्गा
माँ दुर्गा

-जी हाँ मां दुर्गा (Maa durga) को सभी पाप और दुखों को मिटाने वाली देवी कहा गया है।

-कहते हैं कि जो भी माँ को सच्चे दिल से पूजे, माँ उससे अवश्य प्रसन्न होती है।

-आज हम आपको बता रहें है अगर आप भी दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहते है।

-तो किन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा, तो आइये जानते है:

दुर्गा सप्तशती पाठ

  • दुर्गा सप्तशती का पाठ आपमें ऊर्जा का संचार करता है।
  • इसके पाठ करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि दुर्गा सप्तशती की पुस्तक अपने हाथ में या जमीन पर न रखी जाए ।
दुर्गा सप्तशती पाठ
दुर्गा सप्तशती पाठ
  • किसी आधार पर रखने के बाद ही दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया जाए।
  • पाठ को मन ही मन में पढ़ा जाये और न ही पाठ का उच्चारण स्वर बहुत तेज हो।
  • पाठ करते समय वाचक का स्वर संतुलित एवं मध्यम रहे।

  • मन को एकाग्रचित्त बनाये रखना भी बहुत आवश्यक है, वरना पाठ करने का कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा।
  • पाठ के बाद माँ भगवती दुर्गा की जय-जयकार भी करनी चाहिए।

धार्मिक कथा ( Religious Story)

  •  पाठ से पूर्व भगवान् श्री गणेश(Ganesh), भोलेनाथ(Bholenath), विष्णु(Vishnu) भगवान, लक्ष्मीजी(Lakshmi), सरस्वतीजी(Saraswati) एवं महाकाली(Mahakali) का ध्यान करना चाहिए।
माँ दुर्गा
माँ दुर्गा
  • तत्पश्चात विधि पूर्वक कलश, पञ्च लोकपाल, दस दिकपाल, सोलह मातृका, नवग्रह आदि का पूजन करते हुए दुर्गा       सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ करना चाहिए।
  • दुर्गा सप्तशती के पाठों में शापोद्धार सहित कवच, अर्गला, कीलक एवं तीनों रहस्यों को भी पढ़ना चाहिए।
  • पाठ पूर्ण होने के बाद नवार्ण मन्त्र(Nirvaan mantra) का 108 बार जप करना चाहिए।

  • इसके बाद पुनः शापोद्धार, उत्कीलन, मृत संजीवनी विद्या के मन्त्र, ऋवेदोक्त देविसुक्त, प्राधानिक रहस्य, वैकृतिक रहस्य, मूर्ति रहस्य, सिद्धिकुंजिकास्त्रोत, क्षमा प्रार्थना, भैरवनामावली पाठ, आरती तथा मन्त्र पुष्पांजलि के साथ पाठ का समापन करना चाहिए।
  • जो लोग किसी कारण से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हों वे नवरात्र(Navratri)  में व्रत रखकर प्रतिदिन माँ भगवती के समक्ष हवन व आरती कर सकते हैं।

     माँ भगवती
    माँ भगवती
  • नवरात्र (Navratri) के दिनों में देवी पूजन की पूर्णता के लिए कन्या-लांगुरों की पूजा करके उन्हें प्रसाद देकर प्रसन्न करना भी जरुरी है इससे माँ भगवती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • नवरात्र (Navratri) में विधि-विधान से देवी जी की आराधना करने से भक्तों के समस्त मानसिक और शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं।
  • जीवन में सुख, समृद्धि, सुख-शान्ति, सुरक्षा और विश्वास आने लगते हैं।

आदिशक्ति देवी की पूजा(Pooja) अर्चना और दुर्गा सप्तशती का पाठ सम्पूर्ण जगत के लिए कल्याकारी सिद्ध होता है।

॥ जय माँ दुर्गा ॥

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